युवा पीढ़ी को कश्मीर के इतिहास से परिचित कराएंगे 'राजतरंगिणी' के पात्र;एनबीटी की नई पहल
मनीषा
- 22 Jul 2026, 01:55 PM
- Updated: 01:55 PM
( नरेश कौशिक )
श्रीनगर, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) ने जम्मू कश्मीर की युवा पीढ़ी को प्रदेश के इतिहास से परिचित कराने के लिए महान विद्वान कवि एवं इतिहासकार कल्हण द्वारा रचित महाकाव्य 'राजतरंगिणी' के पात्रों को नए रूप में पेश किया है।
इन पात्रों में कश्मीर की प्रथम महिला शासक रानी यशोवती और अंतिम महिला शासक रानी कोटा रानी पर आधारित उपन्यास भी शामिल हैं।
'नीलमत पुराण' के हवाले से कहा जाता है कि रानी यशोवती न केवल कश्मीर एवं भारत की अपितु विश्व इतिहास की प्रथम ज्ञात महिला शासक हैं।
'राजतरंगिणी' संस्कृत भाषा में रचित कश्मीर का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक काव्य-ग्रंथ है, जिसकी रचना 12वीं शताब्दी में महान कवि-इतिहासकार कल्हण ने लगभग 1148–1150 ईस्वी के बीच की थी। कल्हण कश्मीर के महाराज हर्षदेव (1068-1101) के महामात्य चंपक के पुत्र और संगीत मर्मज्ञ कनक के अग्रज थे।
एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने यहां जारी तीसरे चिनार पुस्तक महोत्सव में 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि कल्हण कृत 'राजतरंगिणी' केवल इसलिए याद नहीं की जाती कि इसमें कश्मीर के राजाओं के नाम, उनके शासनकाल, युद्धों एवं उपलब्धियों का वृतांत कलमबद्ध है, बल्कि यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें राजाओं और उनके जीवनकाल का वर्णन निरपेक्ष दृष्टि से किया गया है।
एनबीटी द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, स्वयं कल्हण ने 'राजतरंगिणी' में कहा है कि एक सच्चे इतिहास लेखक की वाणी को न्यायाधीश के समान राग-द्वेष-विनिर्मुक्त होना चाहिए, तभी उसकी प्रशंसा हो सकती है। इसके महत्व और निष्पक्षता को देखते हुए ही 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में औरेल स्टीन ने पण्डित गोविन्द कौल के सहयोग से राजतरंगिणी का अंग्रेजी अनुवाद कराया था।
एनबीटी के अध्यक्ष और प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर मिलिंद सुधाकर मराठे ने बताया कि राजतरंगिणी की कहानियाँ राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की ओर से सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहरों एवं ज्ञान परंपरा के प्रति जागरुकता बढ़ाने की महत्वाकांक्षी परियोजना है।
उन्होंने बताया कि इन उपन्यासों की रचना प्रक्रिया में द्वितीय चिनार पुस्तक महोत्सव 2025 में आयोजित राजतरंगिणी कार्यशाला के अंतर्गत कल्हण कृत राजतरंगिणी के विशिष्ट पात्रों में रानी यशोवती, अवंतिवर्मा, ललितादित्य, मातृगुप्त, रानी दिद्दा, नर-किन्नर, जयापीड, जय सिंह एवं कोटा रानी जैसे विशिष्ट पात्रों पर लिखे जाने वाले उपन्यासों पर चर्चा की गई।
उपर्युक्त शृंखला के प्रथम चरण में तृतीय चिनार पुस्तक महोत्सव में सम्राट ललितादित्य, रानी यशोवती, महाराज जयापीड, मातृगुप्त एवं कोटा रानी पर केंद्रित उपन्यासों का प्रदेश के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोकार्पण किया।
प्रोफेसर मराठे ने कहा कि इसके अगले चरणों में पाठकों को कश्मीर के अन्य शासकों पर भी उपन्यास पढ़ने को मिलेंगे।
प्रथम चरण में, कश्मीर के भव्य मार्तंड मंदिर का निर्माण कराने वाले सम्राट ललितादित्य, रानी यशोवती, सम्राट जयापीड, सम्राट मातृगुप्त और कोटा रानी की कहानियों को किशोर वर्ग के लिए प्रस्तुत किया गया है।
विज्ञप्ति के अनुसार, 'ललितादित्य' शीर्षक से प्रकाशित उपन्यास सम्राट ललितादित्य द्वारा कन्नौज के शक्तिशाली राजा यशोवर्मा को हराने, उत्तर, दक्षिण और मध्य एशिया, तिब्बत, तुर्किस्तान तक अपने राज्य का विस्तार करने के साथ ही अरब आक्रमणकारियों और तिब्बत की उस समय की ताकतवर सेना को भारत की सीमाओं से खदेड़ने की दास्तां है।
इसी प्रकार कश्मीर की प्रथम महिला शासक रानी यशोवती के बारे में बताया गया है कि उनके राजतिलक से पूर्व कश्मीर दो बड़े युद्धों की विभीषिका झेल चुका था। ऐसे विकट समय में रानी ने अपनी सामरिक सूझबूझ, विवेक और बुद्धिमत्ता से राज्य को सुदृढ़ नेतृत्व दिया, विद्रोहियों का शमन किया और अपने अल्पायु पुत्र की संरक्षिका बनकर राज-काज संभाला।
भाषा नरेश
नरेश मनीषा
मनीषा
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