सीमा पर शांति भारत-चीन के सामान्य संबंधों की पूर्व शर्त : जयशंकर ने वांग यी से कहा
शफीक
- 22 Jul 2026, 01:25 PM
- Updated: 01:25 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को मनीला में चीन के अपने समकक्ष वांग यी से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत और चीन के बीच सामान्य संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पूर्व शर्त है तथा द्विपक्षीय संबंध परस्पर सम्मान, हित और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए।
बातचीत के दौरान जयशंकर ने बाजार तक पहुंच, व्यापार असंतुलन और आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दों पर भारत की चिंताएं भी उठाईं।
दोनों मंत्री दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के ढांचे के तहत उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेने के लिए फिलीपीन की राजधानी मनीला में हैं।
भारत और चीन ने पिछले कुछ महीनों में अपने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। पूर्वी लद्दाख में चार वर्ष से अधिक समय तक चले सीमा गतिरोध के कारण दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था।
जयशंकर ने बैठक में अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा, ''हमारा मानना है कि स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध परस्पर सम्मान, परस्पर हित तथा एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं का ध्यान रखने के आधार पर ही बेहतर ढंग से विकसित किए जा सकते हैं।''
उन्होंने कहा, ''ऐसे संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।''
विदेश मंत्री ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ''सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, सामान्य संबंधों की स्पष्ट रूप से पूर्व शर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस महत्वपूर्ण उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत करते रहे हैं।''
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए।
जयशंकर ने कहा, ''दो बड़े और महत्वपूर्ण देशों तथा करीबी पड़ोसियों के रूप में भारत और चीन के अपने-अपने विशेष हित होना स्वाभाविक है।''
उन्होंने कहा, ''इसीलिए हमारे नेताओं ने सहमति जताई थी कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए। उन्हें उचित तरीके से संभालना कूटनीति की जिम्मेदारी है।''
विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ी भारत की चिंताओं को भी उठाया और कहा कि भारत-चीन संबंधों के इन महत्वपूर्ण पहलुओं का समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''इस संबंध में बाजार तक निष्पक्ष पहुंच और व्यापार संतुलन बेहद महत्वपूर्ण हैं। आपूर्ति शृंखलाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंताएं हैं। सरकारी स्तर पर और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को सुगम बनाने पर भी हमें ध्यान देना चाहिए।''
जयशंकर ने कहा, ''हमें अपनी परस्पर प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न तंत्रों और मंचों की बैठकें आयोजित करने पर भी सहमति बनानी होगी।''
कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर टकराव वाले कई स्थानों से अपने सैनिक पीछे हटा लिए।
दोनों पक्षों ने अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले अंतिम दो स्थानों देपसांग और डेमचोक से सैनिकों को पीछे हटाने के समझौते को अंतिम रूप दिया था।
समझौता होने के कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कजान में बातचीत की तथा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए कई फैसले किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले वर्ष अगस्त में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर की यात्रा की थी।
मोदी और शी ने एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर विस्तृत बातचीत की थी। इस दौरान मोदी ने कहा था कि भारत परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जयशंकर ने कहा, ''अक्टूबर 2024 में कजान में हमारे नेताओं की बैठक के बाद से भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। इस दिशा को तब और मजबूती मिली, जब दोनों नेता पिछले अगस्त में तियानजिन में मिले।''
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए पिछले कुछ महीनों में उठाए गए कदमों का स्वागत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''इनमें सीधी उड़ानें फिर शुरू करना, वीजा व्यवस्था को अद्यतन करना, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करना और सीमा व्यापार को दोबारा आरंभ करना शामिल है।''
जयशंकर ने ब्रिक्स समूह के ढांचे के तहत शुरू की गई विभिन्न पहल के लिए चीन के समर्थन की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, ''भारत इस वर्ष ब्रिक्स का अध्यक्ष है। मैं इस अवसर पर हमारी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स की विभिन्न गतिविधियों और पहल को चीन द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना करना चाहता हूं।''
उन्होंने कहा, ''वर्तमान में वैश्विक स्थिति बेहद जटिल है। अंतरराष्ट्रीय बैठक में इसके कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचारों का आदान-प्रदान करना उचित होगा।''
भाषा प्रचेता शफीक
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