अदालत के आदेश के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया गया
पवनेश
- 21 Jul 2026, 10:48 PM
- Updated: 10:48 PM
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मंगलवार शाम सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उन्हें उपचार के लिये गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
मेदांता अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि वांगचुक को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शाम 7:28 बजे एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया। उन्हें आईसीयू-8 में भर्ती किया गया है और आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सुशीला कटारिया की निगरानी में उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक को तुरंत यहां के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाने का आदेश दिया।
सफदरजंग अस्पताल के एक बयान में कहा गया है, "सोनम वांगचुक को आज शाम 06:40 बजे वीवीएमसी और सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और दिल्ली उच्च न्यायालय के 21 जुलाई 2026 के आदेश के अनुसार इलाज के लिए उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के चिकित्सकों की टीम को सौंप दिया गया है।"
बयान में कहा गया, "सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय उनके रक्त संबंधी मानक स्थिर थे।"
इसमें कहा गया, "इलाज जारी रखने के लिए सभी जरूरी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की कॉपी वहां की मेडिकल टीम को सौंप दी गई हैं।"
इससे पहले, मुख्य न्यायधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कार्यकर्ता की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की अपील पर यह आदेश दिया। उन्होंने उच्च न्यायालय के रविवार के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के अस्पताल में कार्यकर्ता के जारी इलाज में दखल देने और उन्हें मेदांता अस्पताल ले जाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।
अदालत ने मेदांता अस्पताल के निदेशक से कहा कि वह वांगचुक की लगातार निगरानी के लिए जरूरी विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों की एक टीम बनाएं।
इसमें कहा गया है कि चिकित्सक स्वीकृत चिकित्सकीय नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार दवा देंगे, "जिसका पालन अपीलकर्ता के पति को करना होगा"।
अदालत ने कहा कि वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल में ले जाया जाना चाहिए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का पालन हो सके।
भाषा रंजन पवनेश
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