विधायक मदन मित्रा ने ममता को अभिषेक का साथ छोड़ने के लिए एक महीने का समय दिया
नरेश
- 21 Jul 2026, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
कोलकाता, 21 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को ''अभिषेक का साथ छोड़कर'' जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं से फिर जुड़ने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने साथ ही तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से अपनी ''गलतियों'' को स्वीकार करने को कहा।
मित्रा ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट द्वारा मेयो रोड पर समानांतर आयोजित 21 जुलाई शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए ममता और अभिषेक बनर्जी दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया और संगठन को कमजोर होने दिया।
उन्होंने कहा, ''मैं ममता बनर्जी को एक महीने का समय दे रहा हूं। अभिषेक का हाथ छोड़िए और तृणमूल कार्यकर्ताओं का हाथ थामिए। तृणमूल अभिषेक की पार्टी नहीं है, यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है। हर चीज अभिषेक के इर्द-गिर्द ही क्यों घूमे?''
ममता को संबोधित करते हुए मित्रा ने कहा, ''पार्टी में यह तीन-तरफा विभाजन किसकी वजह से हुआ? आपको अभिषेक या उन फिल्मी हस्तियों ने मुख्यमंत्री नहीं बनाया, जिन्हें आप पसंद करती हैं, बल्कि उन लाखों तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बनाया है, जिन्होंने आपके लिए मेहनत की।''
कामरहाटी से विधायक मित्रा ने कहा कि यदि ममता अभिषेक के प्रति अपना समर्थन छोड़कर फिर से कार्यकर्ताओं के बीच लौटने को तैयार होती हैं तो पार्टी उनका खुले दिल से स्वागत करेगी।
महाभारत के पात्र गांधारी का उल्लेख करते हुए जिसने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी, मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी अब गांधारी की भूमिका निभा रही हैं। वह परोक्ष तौर पर यह इशारा कर रहे थे कि ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर हो रही घटनाओं से अवगत होने के बावजूद चुप्पी साधे रखी है।
उन्होंने कहा, ''अगर उनमें साहस है तो ममता को इस मंच पर आकर माफी मांगनी चाहिए। हम उनके पैरों के नीचे अपने गमछे बिछा देंगे। उन्हें सिर्फ एक बार स्वीकार करना होगा कि उन्होंने गांधारी जैसा व्यवहार किया। कोई उन पर एक अंडा तक नहीं फेंकेगा।''
अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए मित्रा ने कहा, ''बागियों के ममता के पास लौटने पर आपने एक घंटे के भीतर इस्तीफा देने की बात कही थी। मैं आपको दो घंटे का समय देता हूं कि आप यहां आएं और स्वीकार करें कि आपने गलतियां की हैं। कोई आप पर अंडा नहीं फेंकेगा। यह मान लीजिए कि आपकी वजह से पार्टी नीचे गई है और आप उस पाप से खुद को मुक्त करना चाहते हैं।''
मित्रा ने अभिषेक बनर्जी के निजी विमानों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय महासचिव द्वारा चार्टर्ड विमान और हेलीकॉप्टर पर खर्च किया जाने वाला पैसा लाखों पार्टी कार्यकर्ताओं का है। हालांकि, उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया।
इस साल वार्षिक 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम में तृणमूल में अभूतपूर्व विभाजन देखने को मिला। कोलकाता में तीन अलग-अलग रैलियां आयोजित की गईं-आधिकारिक ''कालीघाट'' गुट, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट (जो खुद को ''असली तृणमूल'' बताता है) और कांग्रेस की रैली।
तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों के बहुमत से अलग हुए गुट ने दिल्ली में अलग से शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित किया। ये सांसद अब एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं।
ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी और तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर के नेताओं में शामिल मदन मित्रा हाल में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज को लेकर बढ़ते असंतोष, पुराने नेताओं की कथित अनदेखी और जमीनी नेतृत्व एवं ममता-अभिषेक खेमे के बीच बढ़ती दूरी के बीच ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे।
मित्रा को पहले सारदा चिटफंड घोटाले से कथित संबंधों के मामले में जेल जाना पड़ा था। वह अब अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ बंगाल में कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं।
वर्ष 1993 के 21 जुलाई आंदोलन को याद करते हुए मित्रा ने कहा कि प्रदर्शन वाले दिन सुबह आठ बजे वह ममता बनर्जी के आवास गए थे और दावा किया कि यह आंदोलन जमीनी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खड़ा किया था।
उन्होंने कहा, ''मैं, बॉबी (फिरहाद हकीम), देबा (देवाशीष कुमार), अरूप (विश्वास) और चंद्रिमादी (भट्टाचार्य)—हम सभी दक्षिण कोलकाता से थे और यहां मौजूद थे। यह वही गांधी प्रतिमा है। उस दिन मैं सुबह आठ बजे ममता बनर्जी के घर गया था, लेकिन मैं वहां जाने का उद्देश्य नहीं बताऊंगा।''
उन्होंने शहीद दिवस कार्यक्रम के स्वरूप में समय के साथ आए बदलाव की भी आलोचना की और कहा, ''अगर आज ममता इस मंच पर होतीं तो शहीदों के परिवारों को फिर पीछे कर दिया जाता और मशहूर हस्तियां सुर्खियों में होतीं।''
भाषा अमित नरेश
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