भारतीय नाविकों की मौत मामला: रूसी दूतावास के प्रभारी अधिकारी को किया गया तलब
निहारिका
- 21 Jul 2026, 11:18 AM
- Updated: 11:18 AM
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) भारत ने यूक्रेन के तट पर गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत के मामले में मंगलवार को यहां रूसी दूतावास के प्रभारी अधिकारी (सीडीए) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्रालय ने रूसी राजनयिक से कहा कि वाणिज्यिक जहाज पर यह हमला अस्वीकार्य है जिसमें भारतीय नागरिकों की जान चली गई।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि रूस ने रविवार को यूक्रेन के समुद्री गलियारे से गुजर रहे एक असैन्य जहाज पर हमला किया और इसके चालक दल में सीरिया और भारत के नागरिक शामिल थे।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय नाविकों की मौत का यह पहला मामला है।
यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले 'एमवी गोल्डन लियो' नामक जहाज पर रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पोत पर चालक दल के कुल 17 सदस्यों में से पांच भारतीय नागरिक थे।
भारत ने इस हमले की निंदा करते हुए दोहराया कि वाणिज्यिक पोतों को निशाना बनाना और निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों की जान जोखिम में डालना ''निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए।''
विदेश मंत्रालय ने कहा, '' 'एमवी गोल्डन लियो' पर 19 जुलाई की शाम ओडेसा बंदरगाह से रवाना होते समय हमला हुआ। घटना के समय जहाज पर चालक दल के 17 सदस्य सवार थे जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे।''
मंत्रालय ने कहा, ''उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो गई है जबकि एक भारतीय नागरिक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।''
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास कर रहा है।
मंत्रालय ने कहा, ''हम मृत भारतीय नागरिकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।''
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को रूस का प्रत्यक्ष रूप से नाम लिए बिना कहा था , '' भारत इस तरह के हमलों की निंदा करता है। साथ ही दोहराता है कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, चालक दल के निर्दोष सदस्यों के जीवन को खतरे में डालना अथवा किसी भी तरह से जहाजरानी एवं व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाना निंदनीय है तथा इससे बचा जाना चाहिए।''
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