मौजूदा स्वरूप में काम नहीं करेगी सिंधु जल संधि: आधिकारिक सूत्र
रंजन
- 20 Jul 2026, 10:31 PM
- Updated: 10:31 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में फिर से काम नहीं करेगी। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद खत्म करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, जबकि 65 साल से अधिक पुरानी इस संधि के तहत सहयोग फिर से शुरू करने के लिए यह एक आवश्यक शर्त है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि भविष्य में नदी जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू करने के लिए संधि में संशोधन के साथ नए सिरे से बातचीत करनी होगी। हालांकि, यह कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देना स्थायी रूप से बंद करे।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान यह झूठा विमर्श फैलाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने के फैसले के कारण जल संकट पैदा हो रहा है। वास्तव में, पाकिस्तान को मिलने वाले पानी की बड़ी मात्रा उसके अपने भंडारण ढांचे की कमी, बड़े पैमाने पर रिसाव और उसके प्रांतों के बीच जारी जल बंटवारे के विवादों के कारण बर्बाद हो जाती है।
भारत फिलहाल सिंधु जल संधि से बाहर निकलने की सक्रिय रूप से योजना नहीं बना रहा है, लेकिन सूत्रों ने जोर दिया कि एक संप्रभु देश के रूप में भारत को किसी भी ऐसी संधि को समाप्त करने का अधिकार हमेशा सुरक्षित है, जो स्पष्ट रूप से उसके हितों के खिलाफ हो।
एक सूत्र ने कहा, ''सिंधु जल संधि से बाहर निकलने का फैसला भविष्य में पाकिस्तान की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा।''
भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद उठाए गए कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधात्मक कदमों के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इस आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी।
एक सूत्र ने कहा, ''यह कहना सही होगा कि सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं होगी। अगर नदी जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को फिर से सक्रिय करना है, तो उन्हें किसी अलग स्वरूप में लागू करना होगा, मौजूदा स्वरूप में नहीं। और यह तभी संभव होगा जब पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे।''
विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज पर भारत का अधिकार है, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का नियंत्रण पाकिस्तान के पास है।
भारत और पाकिस्तान ने सीमा पार बहने वाली नदियों के प्रबंधन के एकमात्र उद्देश्य से नौ वर्षों तक चली बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
भाषा आशीष रंजन
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2007 2231 दिल्ली