भारत मत्स्य पालन सब्सिडी पर डब्ल्यूटीओ समझौते में शामिल
अजय
- 20 Jul 2026, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) भारत ने सोमवार को घोषणा की कि वह मत्स्य पालन सब्सिडी पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के समझौते में शामिल हो गया है। यह समझौता गैर-कानूनी तरीके से मछली पकड़ने और अत्यधिक दोहन के लिए सरकारी मदद पर रोक लगाता है।
यह समझौता समुद्र में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली मछलियों को पकड़ने और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी पर केंद्रित है।
हालांकि, मत्स्यपालन और भूमि से घिरे जल क्षेत्रों मछली पकड़ने की गतिविधियां इस समझौते के दायरे से बाहर हैं। यह समझौता 15 सितंबर, 2025 को लागू हुआ।
इस समझौते को जून, 2022 में जिनेवा में आयोजित 12वें डब्ल्यूटीओ मंत्री-स्तरीय सम्मेलन में आम सहमति से अपनाया गया था। यह पर्यावरण अनुकूल उपायों के साथ पहला बहुपक्षीय डब्ल्यूटीओ समझौता है।
वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा, ''भारत ने 20 जुलाई, 2026 को मत्स्य पालन सब्सिडी पर डब्ल्यूटीओ समझौते को स्वीकार करने से संबंधित दस्तावेज को जमा किए और इसके साथ वह इस समझौते का हिस्सा बन गया।''
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने औपचारिक स्वीकृति पत्र जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक न्गोजी ओकोन्जो-इवेला को सौंपा।
अग्रवाल आधिकारिक यात्रा पर जिनेवा में हैं।
मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता पर्यावरण अनुकूल तरीके से मछली पकड़ने को बढ़ावा देकर पारंपरिक और इस कार्य से जुड़े छोटे किसानों की आजीविका की रक्षा करता है।
यह गैर-कानूनी, बिना रिपोर्ट की गई और बिना नियम-कानून वाली मछली पकड़ने की गतिविधियों और मछलियां पकड़ने के मामले में अत्यधिक दोहन से जुड़ी सब्सिडी पर रोक लगाता है। इसका मकसद मछली पकड़ने के उन गैर-टिकाऊ तरीकों को रोकना है जो समुद्री संसाधनों के लिए खतरा हैं।
यह समझौता नुकसानदायक सब्सिडी को नियंत्रित कर मछली पकड़ने की एक अधिक निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था भी बनाता है।
मंत्रालय ने कहा, ''इससे भारत जैसे देशों को फायदा होता है, जहां मछली पकड़ने का काम मुख्य रूप से छोटे पैमाने पर होता है और जो औद्योगिक स्तर पर मछली पकड़ने में बड़ी भूमिका नहीं निभाते हैं।'' साथ ही, भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मत्स्य पालन आधारित झींगे की प्रधानता है, जो इस समझौते के दायरे में नहीं आते हैं। इससे देश के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र की मजबूती और प्रतिस्पर्धी क्षमता सुनिश्चित होती है।
यह समझौता समुद्री मछली संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकासशील और सबसे कम विकसित देशों के सदस्यों के लिए उचित छूट भी प्रदान करता है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत की घरेलू मछली पालन प्रबंधन रूपरेखा इस समझौते के अनुरूप है और यह पारंपरिक तथा छोटे पैमाने पर मछली पकड़ने वालों के हितों की रक्षा करता है।
भाषा रमण अजय
अजय
2007 1955 दिल्ली