क्या राम मंदिर चढ़ावा 'चोरी' की जांच के लिए एसआईटी बनाई जा सकती है: न्यायालय ने उप्र से पूछा
नरेश
- 20 Jul 2026, 05:32 PM
- Updated: 05:32 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार से अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की संभावना के बारे में जानकारी मांगी और याचिकाकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करें।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से निर्देश लेने को कहा कि क्या स्थानीय पुलिस के बजाय एसआईटी को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिसने प्राथमिकी दर्ज होने से पहले पूरे मामले की जांच की थी।
सीजेआई ने कहा, "बस एक बात का ध्यान रखें। कृपया इस मामले को राजनीतिक रंग न दें। अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं। यह अपराध का एक साधारण मामला है। हम (यहां) सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि इसकी ठीक से जांच हो।"
शुरुआत में, मेहता ने कहा कि पहले के आदेश का पालन करते हुए राज्य सरकार ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है।
उन्होंने कहा, "जांच चल रही है। आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मैं ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता।"
जब पूछा गया कि क्या एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है, तो मेहता ने कहा, "एसआईटी का गठन सच्चाई का पता लगाने के लिए किया गया था। अब पुलिस इसकी जांच कर रही है। एसआईटी ने बस यह पाया कि यह एक संज्ञेय अपराध है।"
पीठ ने गौर किया कि उस एसआईटी में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक शामिल थे और पूछा कि क्या वे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य जांच कर सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा, "हमारी जनहित याचिका में कहा गया है कि जब मंदिर बनाया गया था, तब सभी से चंदा मांगा गया था। अब हम चाहते हैं कि उन रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और अपलोड किया जाए।"
पीठ ने कहा कि वह अगले सोमवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी और कुछ निर्देश जारी करेगी।
पीठ ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को इस मामले में स्थिति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
इसने चढ़ावे में हुई कथित चोरी की निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर जांच की मांग वाली याचिकाओं पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया था।
तीन याचिकाकर्ताओं में से एक, नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग करते हुए न्यायालय का रुख किया।
उन्होंने राम मंदिर का कामकाज संभालने वाले न्यास के हिसाब-किताब का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने की भी मांग की।
अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने इसी तरह के उपायों की मांग करते हुए दूसरी याचिका दायर की।
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर तीसरी याचिका में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग के अलावा, मंदिर न्यास के पूरे वित्तीय कामकाज का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया गया है।
इससे पहले, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक याचिकाकर्ता से कहा था कि वे इस मामले की तुरंत सुनवाई के लिए बाद की किसी तारीख पर इसका उल्लेख करें।
वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि मंदिर न्यास के कामकाज और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और अन्य कथित गैर-कानूनी गतिविधियों की जांच सीबीआई के नेतृत्व वाली बहुविभागीय एसआईटी को करनी चाहिए।
राम मंदिर में चढ़ावे के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट की गुजारिश पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया।
इस एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल थे।
भाषा
प्रशांत नरेश
नरेश
2007 1732 दिल्ली