उच्चतम न्यायालय ने समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया पर गलत आचरण को लेकर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया
वैभव
- 14 Jul 2026, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) कॉमेडियन समय रैना तथा यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने इस अदालत को गुमराह किया है इसलिए उन पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें बताया गया कि रैना ने अपने शो में किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया, जैसा कि पिछले आदेश में उससे कहा गया था।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अपने मंच पर दिव्यांग लोगों को आमंत्रित कर सकते हैं, ताकि 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (एसएमए) जैसी दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त पीड़ित मरीजों के समय पर इलाज के लिए धन जुटाने के उद्देश्य को बढ़ावा दिया जा सके।
उच्चतम न्यायालय ने समय रैना समेत पांच 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों' को निर्देश दिया था कि वे दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाने के मामले में अपने पॉडकास्ट या शो में बिना किसी शर्त के माफी मांगे।
खंडपीठ ने कहा, ''हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों/शपथ पत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है।''
पीठ ने कहा, ''यह कहकर इस कदाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है कि कल एक अनुपालन हलफनामा दाखिल किया गया था, जबकि वास्तव में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।''
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने टिप्पणी की कि वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे (अदालत के) क्षेत्राधिकार से बाहर हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) को ही बदलना पड़ेगा।''
उच्चतम न्यायालय 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' नामक संगठन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि समय रैना ने 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (एसएमए-मांसपेशी एवं तंत्रिका से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी) के इलाज की अत्यधिक लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। याचिका में यह भी आरोप है कि उसने इस बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति का कथित तौर पर मजाक उड़ाया था।
सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने शीर्ष अदालत को बताया कि समय रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए संगठन से कभी संपर्क नहीं किया तथा उनके (आरोपियों) द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि वे मुझसे संपर्क नहीं कर पाये।
उन्होंने कहा, ''अब हमें उनसे उनके शो के लिए अनुरोध करना भी अप्रिय लग रहा है। उन्होंने कथित तौर पर कुछ स्थानों पर दिव्यांग लोगों के साथ शो किए हैं और कार्यक्रम आयोजित किए हैं।''
उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं पता कि वह युवाओं के किस तरह के आदर्श हैं। जाहिर तौर पर समय रैना जैसे लोग युवाओं के आदर्श माने जाते हैं। यह सोचकर ही मुझे चिंता होती है।''
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमारे युवाओं के पास इससे बेहतर आदर्श (आइकन) हैं।''
उन्होंने कहा, ''हाल में उन्होंने (रैना ने) एक नया शो शुरू किया, जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बिना व्यवस्था का मजाक उड़ाया। उन्होंने आरंभ में कहा कि मैं इस बार कुछ ऐसा कर रहा हूं, जो मैंने पिछली सीरीज में नहीं किया था।''
मेहता ने कहा, ''उन्होंने नींबू और मिर्ची टांग रखी है। उसने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा काफी स्पष्ट था। मैं इस मामले में नहीं जाना चाहता था, लेकिन अगर उसने (रैना ने) एसएमए फाउंडेशन या एसएमए से पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया है, तो यह उसके अहंकार को दर्शाता है।''
याचिका में 'इंडियाज़ गॉट लैटेंट' के मेजबान समय रैना और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर तथा निशांत जगदीश तनवर द्वारा किए गए कथित आपत्तिजनक चुटकुलों एवं टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है।
दिव्यांगजनों की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसा कानून बनाने पर विचार करे, जिसके तहत दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारियों से पीड़ित लोगों का अपमान करने या उनका मजाक उड़ाने जैसी टिप्पणियों को दंडनीय अपराध बनाया जाए। शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया था कि इस संबंध में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की तर्ज पर कानून बनाया जा सकता है।
खंडपीठ ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को भविष्य में अपने आचरण के प्रति सावधान रहने की हिदायत दी थी। पीठ ने निर्देश दिया था कि वे हर महीने दिव्यांगजनों की प्रेरक और सफल जीवन यात्राओं पर आधारित दो कार्यक्रम या शो करें, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों, विशेषकर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पैसे जुटाएं जा सकें।
भाषा
राजकुमार वैभव
वैभव
1407 1909 दिल्ली