सार्वजनिक स्थलों पर उल्फा प्रमुख जैसे असमी 'क्रांतिकारियों' की तस्वीर बनाई जानी चाहिए: हिमंत
नरेश
- 10 Jul 2026, 06:04 PM
- Updated: 06:04 PM
गुवाहाटी, 10 जुलाई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि अगर लोग सार्वजनिक स्थानों पर किसी "क्रांतिकारी" की तस्वीर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें इस राज्य से जुड़े लोगों जैसे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) के प्रमुख परेश बरुआ की तस्वीर बनानी चाहिए, न कि क्यूबा के वामपंथी नेता चे ग्वेरा की, जिनका असम से कोई संबंध नहीं है।
शर्मा ने कहा कि वह परेश बरुआ की विचारधारा को स्वीकार नहीं करते और उनकी निंदा भी करते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बरुआ पिछले 30 वर्ष से अपने परिवार से दूर रहकर "संघर्ष" कर रहे हैं।
करीब एक महीने पहले गुवाहाटी में शहर को सुंदर बनाने के अभियान के दौरान दिवंगत गायक जुबिन गर्ग के भित्ति चित्र को हटाए जाने से पैदा विवाद का जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि अगर असम में किसी क्रांतिकारी की तस्वीर बनानी है, तो वह किसी स्थानीय व्यक्ति की होनी चाहिए।
माना जा रहा है कि शर्मा ने यह टिप्पणी जुबिन की पेंटिंग में चे ग्वेरा से जुड़े चित्रों के इस्तेमाल के संदर्भ में कही।
मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर आपको किसी क्रांतिकारी की तस्वीर बनानी है, तो परेश बरुआ की बनाइए। वह पिछले 30 वर्ष से अपना संघर्ष कर रहे हैं। वह सही है या गलत, यह अलग बात है। उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। पराग दास की तस्वीर बनाइए।"
उन्होंने कहा, "हो सकता है मैं परेश बरुआ को स्वीकार न करूं और उनकी निंदा भी करता हूं, लेकिन अगर किसी क्रांतिकारी की तस्वीर बनानी है, तो वह किसी असमी व्यक्ति की होनी चाहिए।"
परेश बरुआ अलगाववादी संगठन उल्फा (आई) का नेतृत्व करते हैं, जो सशस्त्र आंदोलन चला रहा है। वहीं, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता पराग दास की 1996 में गुवाहाटी में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
उन्होंने कहा कि जरूरी अनुमति लेकर सार्वजनिक स्थानों पर भित्ति चित्र बनाए जा सकते हैं, लेकिन "चे ग्वेरा शैली में नहीं।"
उन्होंने कहा कि वह क्यूबाई क्रांतिकारी नेता चे ग्वेरा के बारे में पहले नहीं जानते थे और तस्वीरें देखने के बाद ही उनके बारे में पढ़ा।
उन्होंने कहा, "चे ग्वेरा कौन हैं? मैं क्यूबा गया हूं और उनके बारे में पढ़ाई भी की है। वहां सबसे ज्यादा मादक पदार्थों का कारोबार होता है। हमारा चे से क्या संबंध है? लोग क्यूबा नहीं जा सकते। वहां भारतीय दूतावास सिर्फ एक सौर ऊर्जा स्रोत से चलता है। वहां न सड़कें हैं, न पानी की व्यवस्था। असम की तुलना ऐसे देश से कैसे की जा सकती है?"
जुबिन गर्ग के भित्ति चित्र को हटाए जाने के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।
उन्होंने कहा, "दोनों चित्रकारों ने पुलिस थाने में बयान दिया कि उन्होंने भित्ति चित्र इसलिए हटाया क्योंकि वह जुबिन गर्ग जैसा नहीं लग रहा था। वे न तो मुस्लिम हैं और न ही बांग्लादेशी मियां, बल्कि असमी चित्रकार हैं। जिस ठेकेदार ने यह काम लिया था, वह भी असमी है और तीनों ही जुबिन के प्रशंसक हैं।"
गौरतलब है कि विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले जुबिन गर्ग ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह चे ग्वेरा, चार्ली चैपलिन और असम के प्रसिद्ध कलाकार बिष्णु प्रसाद राभा के समर्थक हैं। ये तीनों वामपंथी विचारधारा से जुड़े माने जाते हैं।
शर्मा ने कहा कि सरकार गायक-संगीतकार जुबिन गर्ग का सम्मान करती है और उनके अंतिम संस्कार स्थल का विकास करा रही है, साथ ही उनकी मौत के मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालत भी गठित की गई है।
पिछले वर्ष 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय जुबिन गर्ग की मौत हो गई थी।
भाषा जोहेब नरेश
नरेश
1007 1804 गुवाहाटी