हिंद-प्रशांत पर नजर: भारत एवं ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु, समुद्र और खनिज क्षेत्रों में संबंध और मजबूत किए
नरेश
- 09 Jul 2026, 02:41 PM
- Updated: 02:41 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
मेलबर्न, नौ जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने में द्विपक्षीय साझेदारी की अहम भूमिका को रेखांकित किया और उनकी इस मुलाकात के दौरान भारत एवं ऑस्ट्रेलिया ने असैन्य परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने संबंधी कई महत्वपूर्ण समझौतों को बृहस्पतिवार को अंतिम रूप दिया।
मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई नेता के साथ व्यापक बातचीत की। मोदी तेजी से बदलते और विभाजित होते भू-राजनीतिक माहौल के बीच व्यापार एवं रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे।
मोदी एवं अल्बनीज की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त घोषणा, ऊर्जा संबंधों पर संयुक्त बयान और साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के लिए एक खाका जारी किया।
असैन्य परमाणु ऊर्जा से जुड़े समझौते के जरिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति का रास्ता खुलेगा। इससे भारत की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को मदद मिलेगी।
दोनों पक्षों ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के साथ-साथ द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते पर भी तेजी से काम करने का निर्णय लिया।
मोदी ने मीडिया में जारी अपने बयान में कहा, ''आज हमने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता खुलेगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हमारे लक्ष्यों को नयी गति मिलेगी।''
उन्होंने कहा, ''महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारा सहयोग हमारी रणनीतिक सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने संबंधी बदलाव के लिए अहम है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हमने साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी शुरू की है।''
मोदी ने कहा कि दोनों पक्ष महत्वपूर्ण खनिज गलियारे पर भी मिलकर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया और स्वतंत्र एवं स्थिर हिंद-प्रशांत के महत्व पर जोर दिया।
रक्षा संबंधों को मजबूत करने की ये नयी पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन द्वारा अपनी सैन्य ताकत दिखाए जाने को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच की गई हैं।
उन्होंने कहा, ''हिंद-प्रशांत क्षेत्र केवल दो महासागरों का संगम नहीं है। यह भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे समान सोच वाले लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं का भी प्रतीक है।''
मोदी ने कहा, ''आज हमने सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण संयुक्त घोषणा जारी की है। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवोन्मेष गलियारे के माध्यम से हम रक्षा स्टार्टअप और उद्योगों को जोड़ने के लिए काम करेंगे।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा सहयोग खाका, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा प्रयासों को नयी गति देगा।
उन्होंने कहा, ''हम पोत निर्माण, पोतों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भी साथ-साथ आगे बढ़ेंगे।''
मोदी ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है।
उन्होंने कहा, ''इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई साझा है, हमारा संकल्प अडिग है और हमारा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।''
मोदी ने कहा, ''हम यह भी मानते हैं कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही हो सकता है। हम मिलकर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता तथा नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।''
अल्बनीज ने अपने संबोधन में कहा कि ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने अहम हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा पर हुआ समझौता शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम के निर्यात को आसान बनाएगा।
उन्होंने कहा, ''यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया से भारत में यूरेनियम का निर्यात सुगम बनाएगी जिससे गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी और ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र को एक अतिरिक्त बाजार मिलेगा।''
अल्बनीज ने कहा कि दोनों पक्ष संबंधों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि ये संबंध लगातार और मजबूत होते रहें।
उन्होंने कहा, ''हमारी रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर ऑस्ट्रेलिया के भारत के साथ संबंध आज जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने पहले कभी नहीं रहे। हमारी साझेदारी पहले कभी इतनी मजबूत नहीं रही।''
उन्होंने कहा, ''हमारा ध्यान अपने देशों के संबंधों को और गहरा तथा विविधतापूर्ण बनाने पर है ताकि हम लगातार और मजबूत होते रहें।''
अल्बनीज ने कहा, ''आज हमने अपने संबंधों के पूरे दायरे में इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। नए ऐतिहासिक समझौतों के माध्यम से हम सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं।''
उन्होंने कहा कि सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा ''व्यावहारिक साझेदारी'' को और गहरा करने का रास्ता तैयार करेगी।
अल्बनीज ने कहा, ''ऑस्ट्रेलिया भारत को शीर्ष स्तरीय सुरक्षा साझेदार मानता है और यह घोषणा शांतिपूर्ण, स्थिर एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।''
उन्होंने कहा, ''हम रणनीतिक समन्वय को बढ़ाएंगे, अपने रक्षा अभ्यासों को और जटिल बनाएंगे तथा अपनी रक्षा सेनाओं के बीच आपसी संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगे।''
भाषा सिम्मी नरेश
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