महाराष्ट्र ऐसी गतिविधियों का समर्थन न करे जिनसे कर्नाटक में टकराव की स्थिति पैदा हो: प्रियंक खरगे
नरेश
- 09 Jul 2026, 03:57 PM
- Updated: 03:57 PM
बेंगलुरु, नौ जुलाई (भाषा) कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र एमईएस जैसी संस्थाओं को कानूनी मदद देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करना चाहिए जिससे टकराव की स्थिति पैदा होने का जोखिम हो।
प्रियंक ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कर्नाटक सीमावर्ती जिले बेलगावी में सक्रिय 'महाराष्ट्र एकीकरण समिति' (एमईएस) जैसे महाराष्ट्र-समर्थक संगठनों को ऐसी कोई भी हरकत या आंदोलन करने की अनुमति नहीं देगा, जिससे टकराव की स्थिति पैदा हो। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य इसे 'चेतावनी या सलाह', जिस भी रूप में चाहे, ले सकता है।
प्रियंक ने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र सरकार मामले में उचित 'समझदारी और सूझबूझ' का परिचय देगी।
कांग्रेस नेता ने ये टिप्पणियां उस सवाल के जवाब में कीं, जिसमें उनसे पूछा गया था कि महाराष्ट्र सरकार ने कर्नाटक में मुकदमों का सामना कर रहे मराठी भाषी लोगों और एमईएस जैसे संगठनों को कानूनी मदद देने की घोषणा की है।
प्रियंक ने कहा, ''अगर वे अपने संगठनों का समर्थन करना चाहते हैं, तो उन्हें करने दें—इसमें हस्तक्षेप का हमें कोई अधिकार नहीं है। लेकिन जब हमारी जमीन, पानी, राज्य और भाषा की बात आती है, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। वे जो चाहें करें, एमईएस या किसी और का समर्थन करें। लेकिन चाहे महाराष्ट्र हो या गोवा, केरल, तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश, अगर सीमा से जुड़े कोई मुद्दे हैं, तो अंतत: संबंधित मामले को कानूनी तौर पर ही सुलझाना होगा।''
उन्होंने कहा, ''सिर्फ इसलिए कि कुछ संगठन या कोई मुख्यमंत्री या मंत्री कुछ कहते हैं, हम सीमाएं तय नहीं कर सकते, भले ही हम ऐसा चाहते हों। सीमाएं 'राज्य पुनर्गठन आयोग' ने भाषाई आधार पर तय की हैं।''
प्रियंक ने कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार एमईएस जैसे संगठनों को कानूनी मदद देती है, तो कर्नाटक कुछ नहीं कर सकता।
हालांकि, उन्होंने कहा, ''ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए, जिससे टकराव की स्थिति पैदा होने का जोखिम हो। हम भी ऐसी चीजें नहीं होने देंगे। वे इसे चेतावनी या सलाह, कुछ भी समझें। हम अपने राज्य में अराजकता फैलाने या ऐसे आंदोलन करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिनसे टकराव हो सकता है।''
प्रियंक ने कहा, ''वे कानूनी लड़ाई लड़ने, अपनी मांगें रखने और कानून के दायरे में आने वाली कोई भी चीज करने के लिए आजाद हैं। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है। हम भी ऐसा ही करेंगे। लेकिन सरकार के तौर पर उनकी सभी गतिविधियों का समर्थन करना स्वीकार्य नहीं है। मुझे उम्मीद है कि महाराष्ट्र सरकार समझदारी और सूझबूझ का परिचय देगी।''
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा था कि कर्नाटक के साथ लंबे समय से जारी सीमा विवाद की उच्चतम न्यायालय में जल्द से जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों को नियुक्त करेगी।
एक उच्च-स्तरीय समिति की बैठक को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा था कि इस विवाद को सुलझाने और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले मराठी भाषी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी।
उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार मुकदमों का सामना कर रहे मराठी भाषी लोगों को कानूनी सहायता देगी, उनके लिए वकील नियुक्त करेगी और पूरी प्रक्रिया का खर्च भी उठाएगी।
भाषा पारुल नरेश
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