कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई की रैली को सशर्त अनुमति दी
सुरेश
- 07 Jul 2026, 07:43 PM
- Updated: 07:43 PM
कोलकाता, सात जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कोलकाता पुलिस द्वारा ममता बनर्जी समर्थक तृणमूल युवा कांग्रेस को आठ जुलाई को दक्षिण कोलकाता में विरोध रैली निकालने की अनुमति देने से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने विपक्षी गुट को कुछ कड़ी शर्तों के साथ रैली आयोजित करने की अनुमति दे दी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने रैली के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव करते हुए कहा कि यह 'बालीगंज फारी' चौराहे से शुरू होकर हाजरा रोड से गुजरेगी, लेकिन इसका समापन पहले से प्रस्तावित सरत बोस रोड स्थित लैंसडाउन मार्केट के बजाय हाजरा चौराहे पर होगा, ताकि आम जनता को होने वाली असुविधा कम की जा सके।
अदालत ने रैली का समय भी बदलते हुए इसे अपराह्न तीन बजे से शाम छह बजे के बजाय अपराह्न ढाई बजे से शाम साढ़े चार बजे तक सीमित कर दिया। साथ ही, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए केवल हैंडहेल्ड माइक्रोफोन के उपयोग की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि रैली मार्ग का एक हिस्सा वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखा जाएगा तथा गंतव्य पर पहुंचने के बाद भीड़ को तुरंत हट जाना होगा।
अदालत ने साथ ही रैली में भाग लेने वालों की संख्या 1,000 से अधिक न होने का भी निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दायर रिट याचिका में कहा कि उसने एक जुलाई को रैली की अनुमति मांगी थी, लेकिन छह जुलाई को संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) ने कार्यदिवस में रैली से आम जनता को होने वाली असुविधा, आसपास अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि दो जुलाई को प्रस्तावित एक अन्य विरोध रैली की अनुमति भी कोलकाता पुलिस ने पिछले सप्ताह नहीं दी थी। उसका कहना था कि पुलिस का यह रवैया संविधान द्वारा प्रदत्त शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन है।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने रैली का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या की हालिया घटना इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा होगी।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने याचिका का विरोध करते हुए मई 2023 के उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि रैली आयोजित करने के लिए आयोजकों को 15 दिन पहले अनिवार्य सूचना देनी चाहिए थी और पुलिस के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना चाहिए था।
हालांकि, अदालत ने कहा कि ''रैली की अनुमति अस्वीकार करते समय पुलिस के आदेश में कहीं भी अपर्याप्त नोटिस का उल्लेख नहीं किया गया था।''
राज्य सरकार की इस दलील पर कि रैली रविवार को आयोजित की जानी चाहिए थी, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि ''सरकार यह तय नहीं कर सकती कि कोई संगठन किस दिन रैली करेगा।''
उन्होंने राज्य सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसका यही रुख है तो वह इस संबंध में अदालत में शपथपत्र दाखिल करे।
भाषा गोला सुरेश
सुरेश
0707 1943 कोलकाता