चंपत राय और अनिल मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य नहीं: गिरि
जितेंद्र
- 07 Jul 2026, 04:52 PM
- Updated: 04:52 PM
अयोध्या, सात जुलाई (भाषा) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पूर्व महासचिव चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफे सोमवार को हुई संस्था की बैठक में स्वीकार कर लिये गये तथा दोनों ही अब ट्रस्ट के सदस्य नहीं रहे।
ट्रस्ट, आगामी 22 जुलाई को होने वाली अपनी अगली बैठक में यह फैसला करेगा कि चंपत राय की जगह नियुक्त किए गए कृष्ण मोहन को स्थायी रूप से नियुक्त किया जाए या नहीं।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में स्पष्ट किया कि सोमवार को हुई बैठक में इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद राय और मिश्रा ट्रस्ट का हिस्सा नहीं रहे।
उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि दोनों केवल अपने पदों से हटे हैं लेकिन अभी भी ट्रस्ट के सदस्य हैं।
गिरि ने राय और मिश्रा के इस्तीफे के बाद गोपाल नागरकट्टे (जिन्हें गोपाल राव के नाम से भी जाना जाता है) को विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने के फैसला की पुष्टि की।
उन्होंने बताया, "फिलहाल कृष्ण मोहन को ट्रस्ट ने अंतरिम महासचिव बनाया है लेकिन बाद में ट्रस्ट उन्हें स्थायी महासचिव बनाने का फैसला कर सकता है। अभी वह अंतरिम महासचिव ही हैं।"
गिरि ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के सदस्य 22 जुलाई को होने वाली बैठक में कृष्ण मोहन की नियुक्ति और रिक्त पदों पर उपयुक्त लोगों के चयन को लेकर फैसला ले सकते हैं।
इस बीच, ट्रस्ट के फैसले पर अयोध्या के संतों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है।
महंत शशिकांत दास ने चंपत राय को जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि यह 'दुखद' है क्योंकि कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उन्हें दोषी नहीं पाया था।
वहीं, जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य ने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए राय का इस्तीफा जरूरी था।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि संत समुदाय ट्रस्ट के निर्णयों के साथ खड़ा है और उसके हर फैसले का स्वागत करेगा।
उन्होंने विपक्ष पर कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि बिना सबूत के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को राम मंदिर के लिए दिए गए दान में हेराफेरी के आरोपों के बीच राय और मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसी बैठक में ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक और वित्तीय तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति तथा दान व रिकॉर्ड के प्रबंधन को व्यवस्थित करने के फैसले भी लिए।
भाषा चंदन सलीम जितेंद्र
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