राजस्थान सरकार आगामी विस सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने पर कर रही विचार : खर्रा
पवनेश
- 07 Jul 2026, 03:54 PM
- Updated: 03:54 PM
कोटा, सात जुलाई (भाषा) राजस्थान के शहरी विकास और स्वशासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मंगलवार को कहा कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार आगामी विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का दीर्घकालिक लक्ष्य है जिसे वह पूरा कर सकती है।
खर्रा ने यह भी घोषणा की कि केंद्र सरकार ने राज्य में 'जल जीवन मिशन' की मियाद बढ़ा दी है और इसके लिए अतिरिक्त धन आवंटित किया है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पूरे राज्य में लोगों तक साफ पेयजल की पहुंच सुनिश्चित होगी।
खर्रा कोटा शहरी विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा आयोजित 'शहरी सेवा शिविर' में शामिल होने के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए तैयार है।
मंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की सरकार की योजना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा, ''सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून बनाना लंबे समय से एक लक्ष्य रहा है, और मौजूदा सरकार इसे हकीकत में बदलने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है।''
उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार समान यूसीसी लागू करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है और आगामी विधानसभा सत्र में एक विधेयक पेश करने पर विचार कर रही है।
खर्रा ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार पर जल मिशन को शुरू में लागू करने में ''बड़े पैमाने पर अनियमितताओं'' का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका नतीजा राजस्थान को भारी वित्तीय और विकासात्मक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन के विस्तार और उसके बाद मिलने वाली राशि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की गई सीधी अपील का नतीजा है।
खर्रा ने राजस्थान में स्थानीय निकाय और नगरपालिका चुनावों के बारे में कहा कि राज्य सरकार ने चुनाव से पहले की सभी जिम्मेदारियां सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा, ''नगरपालिका की सीमाओं का विस्तार और वार्डों का परिसीमन जैसे ये काम मार्च 2026 के शुरुआती लक्ष्य से पहले ही पूरे कर लिए गए।''
उन्होंने इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने यह पुष्टि की है कि राज्य सरकार नगर पालिकाओं की सीमाओं में बदलाव करने और जरूरत के अनुसार वार्डों का नए सिरे से परिसीमन करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
पिछड़ा वर्ग आयोग के आंकड़ों को संकलित करने और जारी करने में हुई देरी के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक देरी ''पूरी तरह से मानवबल की कमी'' की वजह से हुई है, क्योंकि स्थानीय निकाय ''जनगणना के चल रहे कामों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में व्यस्त रहे हैं।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सियासी हार के डर की वजह से राज्य की भाजपा सरकार स्थानीय निकाय चुनाव कराने में देरी कर रही है। इस आरोप पर पलटवार करते हुए खर्रा ने कहा, ''अगर विपक्ष सचमुच चाहता है कि स्थानीय निकाय चुनाव पिछड़े वर्गों के लिए राजनीतिक आरक्षण के बिना हों, तो उन्हें अपनी मांगें लिखित रूप में देनी चाहिए।''
भाषा धीरज पवनेश
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