करूर भगदड़: गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों वाली द्रमुक की याचिका पर सात जुलाई को सुनवाई
नरेश
- 06 Jul 2026, 03:23 PM
- Updated: 03:23 PM
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सहमति जताई कि वह पिछले साल तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना के मामले में राज्य के मंत्रियों द्वारा गवाहों को ''सक्रिय रूप से प्रभावित करने'' के आरोपों वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की याचिका को सात जुलाई को सूचीबद्ध करेगा।
द्रमुक सचिव आरएस भारती की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी द्वारा मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किए जाने के बाद न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की आंशिक कार्यदिवस पीठ ने याचिका मंगलवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन और मामले में आरोपी अन्य लोगों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही जांच के लंबित रहने के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत को नियंत्रित किया जाए।
अहमदी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार के मंत्री गवाहों को ''सक्रिय रूप से प्रभावित'' कर रहे हैं और आशंका जताई कि पीड़ितों के परिवारों से मिलने के लिए 10 जुलाई को करूर का विजय का प्रस्तावित दौरा जांच को प्रभावित कर सकता है।
अहमदी ने कहा, ''अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अब, कुछ आरोपी जो मौजूदा सरकार में मंत्री हैं, गवाहों को सक्रिय रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने एक अर्जी दाखिल की है।''
पीठ ने कहा, ''हम कल इस पर सुनवाई करेंगे।''
याचिका में उन रिपोर्ट का जिक्र किया गया है जिनके अनुसार मुख्यमंत्री भगदड़ की घटना में मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों को शासकीय आदेश, अनुकंपा के आधार पर नौकरी एवं अन्य लाभ सौंपने के लिए करूर का दौरा करने वाले हैं।
लंबित मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध करते हुए भारती ने कहा कि इस मामले में जिन लोगों के खिलाफ शुरुआत में आरोपपत्र दायर किए गए थे, वे अब 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री बन चुके हैं।
याचिका में 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) विधायक आधव अर्जुन के पिछले हफ्ते दिए गए कथित सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि करूर की घटना का ''हिसाब चुकता करना'' बाकी है और पिछली द्रमुक सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने पुलिस के माध्यम से करूर के लोगों की ''हत्या'' करवाई।
याचिका में सीबीआई को अर्जुन के बयानों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ये बयान ''गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों से छेड़छाड़ करने और जांच में बाधा डालने'' के समान हैं।
याचिका में दलील दी गई है कि जो घटना जांच के दायरे में है, उसकी जांच के विषय से जुड़े लोगों या राजनीतिक व्यक्तियों द्वारा घटना से संबंधित लाभ वितरित करते हुए, महत्वपूर्ण गवाहों से सीधे संपर्क करना, जांच की निष्पक्षता एवं स्वतंत्रता को लेकर संदेह या आशंका पैदा कर सकता है।
पिछले साल 13 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय ने भगदड़ की घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने कहा कि इस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भगदड़ की इस घटना में 41 लोगों की मौत हो गई थी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) की स्वतंत्र जांच के अनुरोध वाली याचिका पर आदेश देते हुए शीर्ष अदालत ने सीबीआई जांच की निगरानी के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक निगरानी समिति भी गठित की थी।
विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन और एकल सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति से संबंधित तमिलनाडु सरकार के निर्देशों पर रोक लगाते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि वह केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को पूरा सहयोग दे।
इससे पूर्व पुलिस ने कहा था कि रैली में लगभग 27,000 लोग शामिल हुए थे जो उम्मीद से कहीं अधिक (करीब तीन गुना) थे और इस हादसे के लिए विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में हुई सात घंटे की देरी को जिम्मेदार ठहराया था।
भाषा सुरभि नरेश
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