विधानसभा कार्यवाही पर ट्रोलिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता : विस अध्यक्ष राधाकृष्णन
दिलीप
- 03 Jul 2026, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
कोझिकोड, तीन जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा अध्यक्ष टी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही के संचालन के तौर-तरीकों को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किये जाने को खारिज करते हुए शुक्रवार को कहा कि उनका इरादा ''ट्रोल करने वालों का धंधा चौपट'' करने का नहीं है।
हाल ही में समाप्त हुए विधानसभा सत्र के दौरान हुई नोकझोंक और हल्के-फुल्के संवादों के बारे में पत्रकारों के सवाल पर कांग्रेस नेता राधाकृष्णन ने कहा कि ये बातें पूरी तरह स्वाभाविक थीं, न कि पहले से तय। ये नोकझोंक एवं हल्के-फुल्के संवाद बाद में सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का विषय बन गए।
उन्होंने कहा, ''सदन में ऐसी बातचीत उसी समय होती है। ऐसा नहीं है कि हम पहले से बैठकर स्क्रिप्ट और संवाद तैयार करते हैं तथा तय करते हैं कि क्या कहना है। ये विधानसभा में होने वाली सामान्य बातचीत होती है और उसी के आधार पर प्रतिक्रियाएं भी आती हैं।''
राधाकृष्णन ने कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाकर की जा रही ट्रोलिंग से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा, ''हम आज़ाद पत्रकारिता और सोशल मीडिया के दौर में जी रहे हैं। जो लोग ट्रोल करना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। वैसे भी मेरा किसी (ट्रोलर) का पेशा खत्म करने का कोई इरादा नहीं है।''
अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा के सदस्य जनता द्वारा चुने गए अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं और सदन की कार्यवाही पूरी गंभीरता और गरिमा के साथ चलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''ये लोग केरल की जनता द्वारा शासन चलाने के लिए चुने गए प्रतिनिधि हैं। ये आम लोग नहीं हैं। इसलिए विधानसभा की कार्यवाही उसी गंभीरता और सम्मान के साथ होनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है।''
उन्होंने कहा कि विधानसभा की बड़ी जिम्मेदारी है और उसकी परंपराओं को बनाए रखना सभी का कर्तव्य है।
राधाकृष्णन ने कहा, ''केरल विधानसभा की लगभग 130 साल पुरानी परंपरा है। अगर हमें कई मामलों में भारत में नंबर-1 माना जाता है, तो हमें यह भी लगातार देखना चाहिए कि क्या हम अपने आचरण और सदन की कार्यवाही में भी नंबर-1 बने रह सकते हैं। यही हमारी मलयाली संस्कृति और केरलवासियों की वह छवि है, जो हम दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं।''
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन द्वारा चंपाकुलम मूलम नौका दौड़ के लिए स्थानीय अवकाश घोषित करने के अनुरोध पर कथित तौर पर 'ऑफ-द-रिकॉर्ड' की गई टिप्पणी से जुड़े विवाद के बारे में पूछे जाने पर अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला सुनी-सुनाई बात पर आधारित लगता है।
उन्होंने कहा, ''सच कहूं तो कानून में भी सिर्फ सुनी-सुनाई या अनजाने में सुन ली गई बात को सबूत नहीं माना जाता। फिर मैं ऐसे मामले को गंभीरता से क्यों लूं?''
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की आधिकारिक टिप्पणियां रिकॉर्ड में मौजूद हैं और उनकी पड़ताल की जा सकती है, लेकिन किसी निजी बातचीत को सुन लेने के आधार पर विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
राधाकृष्णन ने कहा, ''जिस संदर्भ में कोई बात कही गई हो, वह बिल्कुल अलग हो सकता है। यह सिर्फ दो लोगों के बीच की बातचीत थी। फिर इसे लेकर विवाद क्यों पैदा किया जाए?''
अध्यक्ष ने कहा कि विधायक ऐसी विधानसभा चाहते हैं, जहां बिना आक्रामकता और टकराव के खुलकर और स्वस्थ तरीके से बहस हो सके।
राधाकृष्णन ने कहा कि उनका उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को सकारात्मक माहौल में चलाना है।
उन्होंने कहा, ''अगर किसी का मकसद ट्रोलिंग करना हो, तो इसके लिए कई और बातें भी उठाई जा सकती हैं। लेकिन हमारा उद्देश्य वह नहीं है। हमारा लक्ष्य सकारात्मक माहौल बनाना और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना है। हमें उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।''
भाषा
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