आंबेडकर विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को अपनाया, पाठ्यक्रम में गीता को शामिल किया: कुलपति
अविनाश
- 29 Jun 2026, 09:18 PM
- Updated: 09:18 PM
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली की कुलपति अनु सिंह लाठर ने कहा है कि विश्वविद्यालय ने 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' (बीकेएस) ढांचे के तहत पाठ्यक्रम में भगवद्गीता और अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों के संदर्भ शामिल किए हैं।
लाठर ने पीटीआई-भाषा को बताया कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' के बजाय 'भारतीय नॉलेज सिस्टम' (बीकएस) शब्द का इस्तेमाल किया है, क्योंकि यह भारत की सभ्यतागत ज्ञान परंपरा को अधिक बेहतर ढंग से अभिव्यक्त करता है।
उन्होंने कहा, "हमने विश्वविद्यालय में सबसे पहला सुधार यही किया कि इसे 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' नहीं कहा। हमने इसे 'भारतीय नॉलेज सिस्टम' नाम दिया, क्योंकि 'इंडियन नॉलेज सिस्टम' कहने से यह हमें उस सीमित कालखंड तक बांध देता है, जब भारत को 'इंडिया' कहा जाता था।"
प्राचीन भारतीय ग्रंथों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने के बारे में लाठर ने कहा कि विश्वविद्यालय ने यह सुनिश्चित किया है कि इन ग्रंथों के संदर्भ शैक्षणिक दृष्टि से उपयोगी हों और छात्रों के लिए आसानी से सुलभ भी रहें।
उन्होंने कहा, "यदि हमने भगवद्गीता का कोई श्लोक शामिल किया है, तो उसके साथ श्लोक संख्या और पृष्ठ संख्या भी दी गई है। हर छात्र के पास मूल ग्रंथों को पढ़ने का समय नहीं होता, इसलिए हमने संदर्भों को अत्यंत सटीक, स्पष्ट और केंद्रित रखा है, ताकि वे संदर्भ और हमारी ज्ञान परंपरा के योगदान, दोनों को समझ सकें।"
कुलपति के अनुसार, 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' के तहत 46 पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विद्वानों की एक टीम ने 18 महीने तक काम किया। विभिन्न विषयों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रत्येक कार्यक्रम के लिए अलग-अलग सामग्री तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रबंधन के छात्रों को चाणक्य के विचार पढ़ाए जाते हैं, जबकि मानविकी, सामाजिक विज्ञान और इतिहास के पाठ्यक्रमों में संबंधित विषयों के अनुरूप अन्य प्राचीन भारतीय स्रोतों को शामिल किया गया है।
लाठर ने कहा कि विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि आंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' के पाठ्यक्रमों को भविष्य में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थान भी अपनाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत किए गए व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसे उन्होंने भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में "प्रतिमान परिवर्तन" बताया।
उन्होंने कहा, "यह बदलाव दृष्टिकोण में परिवर्तन के कारण आया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति वैश्विक मानकों और प्रतिस्पर्धा के अनुरूप है। हमने शिक्षा की एक खुली व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाया है, जिसमें बहुविषयक अध्ययन, अनुसंधान में भागीदारी, फील्ड प्रशिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षण और कौशल विकास पर जोर दिया गया है।"
लाठर ने बताया कि विश्वविद्यालय ने ''राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क'' के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया है तथा रोजगारपरकता पर अधिक ध्यान देते हुए विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा कर उन्हें नए सिरे से तैयार किया है।
भाषा
राखी माधव अविनाश
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