केरल: तिरुवनंतपुरम महापौर के दफ्तर के बाहर माकपा और भाजपा पार्षदों के बीच झड़प
नरेश
- 25 Jun 2026, 05:42 PM
- Updated: 05:42 PM
तिरुवनंतपुरम, 25 जून (भाषा) केरल की राजनीति में हालिया घटनाक्रमों को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बृहस्पतिवार को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के महापौर के कार्यालय के बाहर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों के बीच मामूली झड़प से तनाव की स्थिति बन गई।
माकपा हाल ही में एक हमले के मामले में गिरफ्तार किये गये भाजपा पार्षद आर. सुगाथन के इस्तीफे की मांग कर रही है। सुगाथन के खिलाफ केरल असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (कापा) के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।
केरल उच्च न्यायालय ने एक फैसले में नगर निगम में भाजपा के कई पार्षदों द्वारा ली गई शपथ को अमान्य ठहरा दिया था, जिसके एक दिन बाद यह झड़प हुई।
इन पार्षदों ने शपथ लेते समय 'ईश्वर' के अलावा अन्य नामों का उल्लेख किया था या निर्धारित शपथ/प्रतिज्ञान प्रारूप से अलग शब्दों का इस्तेमाल किया था।
माकपा ने यह भी आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भाजपा पार्षदों द्वारा दोबारा ली गई शपथ निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी।
वामपंथी पार्षदों ने बृहस्पतिवार को महापौर वी. वी. राजेश के कक्ष के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।
पुलिस के अनुसार, जब राजेश भाजपा पार्षदों के साथ अपने कार्यालय में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, तब माकपा पार्षदों ने उन्हें कथित तौर पर रोक दिया।
पुलिस ने बताया कि इससे दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच थोड़ी देर के लिए झड़प हो गई।
पुलिस के मुताबिक, महापौर राजेश सहित माकपा और भाजपा के कई पार्षद इस झड़प में घायल हो गए तथा उनमें से कुछ को अस्पताल ले जाया गया।
पुलिसकर्मी जल्द ही मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप किया, जिसके बाद महापौर अपने कक्ष में प्रवेश कर सके।
राजेश ने अस्पताल ले जाए जाने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए हिंसा के लिए माकपा पार्षद को जिम्मेदार ठहराया।
राजेश ने संवाददाताओं से कहा, ''मेरे साथ पार्षद और आम लोग भी थे। अगर महापौर के कार्यालय को घेर लिया जाए और लोगों को अंदर जाने से रोका जाए, तो जनसामान्य के कामकाज कैसे होंगे?''
उन्होंने कहा कि इस घटना में कई पार्षद घायल हो गये, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं।
राजेश ने कहा, ''उन्हें बाहर विरोध-प्रदर्शन करने की पूरी स्वतंत्रता थी और किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। लेकिन अगर महापौर के कार्यालय को ही अवरुद्ध कर दिया जाए, तो लोगों के कामकाज कैसे आगे बढ़ेंगे?''
उन्होंने कहा कि वह ''किसी भी तरह की गुंडागर्दी'' के आगे नहीं झुकेंगे।
राजेश ने कहा, "महापौर को उनके ही कार्यालय में जाने से रोकने के लिए हिंसा की स्थिति क्यों बनी? वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर सकते हैं और अदालत का रुख कर सकते हैं।"
माकपा नेताओं ने हालांकि आरोप लगाया कि भाजपा पार्षदों ने हिंसा का सहारा लिया।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी की एक महिला पार्षद के सिर में चोट लगी है, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वामपंथी पार्षदों ने महापौर के कक्ष के बाहर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए।
भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने दिसंबर 2025 में तिरुवनंतपुरम निगम की सत्ता संभाली और 101 में से 50 सीट पर जीत हासिल कर एलडीएफ के 45 साल पुराने शासन का अंत कर दिया।
पुलिस ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है।
भाजपा और माकपा दोनों के प्रतिनिधियों ने शिकायत दर्ज कराई है।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने अस्पताल में राजेश से मुलाकात के बाद आरोप लगाया कि निगम की सत्ता गंवाने के बाद माकपा हिंसा का सहारा ले रही है।
उन्होंने कहा, "वे (माकपा कार्यकर्ता)कांग्रेस नेताओं के कार्यालयों के बाहर हिंसा कर सकते हैं लेकिन हम भाजपा के महापौर के कार्यालय में ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं देंगे। चाहे वह पिनराई विजयन हों या माकपा का कोई अन्य नेता, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी हैं। हमारे साथ इस तरह की रणनीति अपनाने की कोशिश न करें।"
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश
2506 1742 तिरुवनंतपुरम