संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसियों ने 13 संकटग्रस्त क्षेत्रों में भुखमरी बढ़ने की चेतावनी दी
मनीषा
- 18 Jun 2026, 11:29 AM
- Updated: 11:29 AM
रोम, 18 जून (एपी) संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसियों ने बुधवार को आगाह किया कि आने वाले महीनों में दुनिया के 13 संकटग्रस्त क्षेत्रों में भीषण भुखमरी की स्थिति और खराब होने की आशंका है तथा संघर्ष, धन की कमी और जलवायु संबंधी आपदाओं के कारण लाखों लोग अकाल के और करीब पहुंच रहे हैं।
खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने अपनी नयी संयुक्त रिपोर्ट में कहा कि जून से नवंबर 2026 के बीच स्थिति और बिगड़ने की आशंका है और करीब 26.6 करोड़ लोग पहले ही खाद्य संबंधी गंभीर असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। एजेंसियों ने तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।
डब्ल्यूएफपी के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा, ''इस रिपोर्ट में दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले महीनों में लाखों और लोगों को गंभीर भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है तथा उनमें से कुछ अकाल के और करीब पहुंच सकते हैं।''
रिपोर्ट के अनुसार, सूडान, दक्षिण सूडान, यमन और गाजा पट्टी सबसे अधिक चिंता वाले संकटग्रस्त क्षेत्र बने हुए हैं। हालात बिगड़ने और अकाल का खतरा बढ़ने के कारण नाइजीरिया तथा सोमालिया को भी अब इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
अफगानिस्तान, कांगो, म्यांमा, हैती, माली तथा पहली बार शामिल किए गए लेबनान और मेडागास्कर भी संकटग्रस्त क्षेत्रों की सूची में हैं।
एजेंसियों ने कहा कि लगभग सभी संकटग्रस्त क्षेत्रों में भुखमरी का मुख्य कारण संघर्ष और हिंसा है। आर्थिक संकट, मानवीय सहायता के लिए धन में भारी कटौती और अल नीनो मौसमी प्रणाली के संभावित प्रभाव ने स्थिति और गंभीर कर दी है। अल नीनो के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ आ सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का दूसरे क्षेत्रों पर पड़ रहा असर और पूर्वी कांगो में इबोला का प्रकोप भी हालात खराब कर रहे हैं। इनके कारण बाजार, आजीविका और सहायता पहुंचाने की व्यवस्था बाधित हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, जरूरतों में भारी वृद्धि के बावजूद खाद्य सहायता और इससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए धनराशि 2022 के बाद से करीब 59 प्रतिशत घट गई है।
हालांकि, वित्तपोषण को लेकर मंगलवार को एक अच्छी खबर भी आई। अमेरिका ने डब्ल्यूएफपी को 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने का संकल्प जताया। एजेंसी ने कहा कि इससे कम से कम 37 देशों में 3.8 करोड़ से अधिक लोगों की मदद की जा सकेगी। उसने कहा कि यह सहायता ऐसे समय मिली है, जब अप्रत्याशित वैश्विक जरूरतों के कारण भुखमरी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है।
इसके बावजूद 2026 के लिए डब्ल्यूएफपी की 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की सहायता अपील को अब भी जरूरत से बहुत कम धन मिला है।
एपी सिम्मी मनीषा
मनीषा
1806 1129 रोम