बंगाल : साल्ट लेक स्टेडियम में विवादित प्रतिमा ध्वस्त की गई
सुरेश
- 23 May 2026, 05:35 PM
- Updated: 05:35 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 23 मई (भाषा) कोलकाता के पास साल्ट लेक स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के बाहर स्थित एक विवादास्पद प्रतिमा को पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देशों के बाद शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
साल्ट लेक स्टेडियम को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है।
राज्य के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने घोषणा की थी कि उक्त प्रतिमा को स्टेडियम परिसर से हटा दिया जाएगा। कई फुटबॉल प्रेमियों ने इस प्रतिमा को "अजीब" और "अर्थहीन" बताकर इसकी आलोचना की थी।
यह प्रतिमा 2017 में साल्ट लेक स्टेडियम के नवीनीकरण के दौरान स्थापित की गई थी। इसमें धड़ का निचला हिस्सा दिखाया गया था, जिसके ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई थी, जिस पर 'बिस्व बांग्ला' का लोगो बनाया गया था। प्रतिमा के दोनों पैरों के ऊपर भी फुटबॉल रखी गई थी, जिनमें से एक पर 'जॉयी' शब्द लिखा हुआ था।
बताया जाता है कि प्रतिमा की डिजाइन की परिकल्पना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी।
यह प्रतिमा अपनी स्थापना के बाद से ही फुटबॉल प्रशंसकों और दर्शकों के बीच बहस का विषय बनी हुई थी। कई लोगों ने देश के प्रमुख फुटबॉल स्थलों में से एक के बाहर इसकी स्थापना के औचित्य पर सवाल उठाया है।
सॉल्ट लेक स्टेडियम में 17 मई को आयोजित मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के डर्बी मुकाबले में शामिल हुए प्रमाणिक ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान प्रतिमा की कड़ी आलोचना की थी।
उन्होंने कहा था, "यह एक विचित्र और बेढंगी प्रतिमा है, जिसमें कटे हुए पैरों पर फुटबॉल रखी हुई दिखाई गई है। कई लोगों का मानना था कि जब से इसे स्थापित किया गया था, तब से पिछली सरकार के लिए चीजें बिगड़ने लगीं।"
खेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के साथ परामर्श के बाद और "फुटबॉल प्रेमियों के बीच स्टेडियम परिसर की मजबूत पहचान बहाल करने" की योजनाओं के अनुरूप प्रतिमा को हटाने का फैसला लिया गया।
अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "पूरे पश्चिम बंगाल में फुटबॉल प्रशंसकों का साल्ट लेक स्टेडियम के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है। हमारा उद्देश्य स्टेडियम के बाहर एक सुंदर और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक खेल प्रतीक का निर्माण करना है।"
अधिकारी के मुताबिक, ध्वस्तीकरण के बाद स्टेडियम के बाहर प्रतिमा के दोनों पैर और उन पर रखी हुई फुटबॉल बची हुई हैं। उन्होंने बताया कि पुराने ढांचे की जगह किसी प्रसिद्ध फुटबॉलर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पहले से ही चर्चा की जा रही है।
अधिकारी के अनुसार, "हम एक ऐसा प्रतीक चाहते हैं, जो वास्तव में पश्चिम बंगाल की फुटबॉल विरासत को दर्शाता हो और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करता हो।"
भाषा पारुल सुरेश
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