भारत-नीदरलैंड साझेदारी: डच कालीन ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
संतोष
- 18 May 2026, 07:52 PM
- Updated: 07:52 PM
(कुणाल दत्त)
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली/पटना, 18 मई (भाषा) भारत और नीदरलैंड के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाए जाने के बीच दोनों देशों के इतिहासकारों और वास्तु विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि इससे भारत में डच कालीन स्थापत्य संबंधी विरासत के बेहतर संरक्षण का मार्ग प्रशस्त होगा।
इतिहासकारों को उम्मीद है कि अब डच कालीन विरासतों का बिहार की राजधानी पटना स्थित कलेक्ट्रेट भवन की तरह पतन नहीं होगा जिसे चार साल पहले ध्वस्त कर दिया गया था।
विशेषज्ञों ने पटना कलेक्ट्रेट भवन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की दिशा में अब गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।
मई 2022 में बुलडोजरों द्वारा ऐतिहासिक पटना कलेक्ट्रेट परिसर को गिराए जाने की तस्वीरें आज भी उन लोगों के मन में ताजा हैं, जिन्होंने सदियों पुराने इस परिसर को बचाने के लिए अभियान चलाया था।
इस परिसर में कई विरासत संरचनाएं थीं, जिनमें प्रतिष्ठित रिकॉर्ड रूम भवन भी शामिल था, जिसका निर्माण डच काल में और बाद में ब्रिटिश राज में कराया गया था।
भव्य स्तंभों वाले रिकॉर्ड रूम भवन को हाल तक पटना के बीचों-बीच डच वास्तुकला के दुर्लभ नमूने के रूप में देखा जाता था, लेकिन 17 मई 2022 को लोगों के विरोध के बावजूद इसे ध्वस्त कर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यात्रा की, जिसके दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक विस्तारित किया। इस घटनाक्रम के बीच पटना से लेकर बर्लिन तक बिहार के लोगों ने डच कालीन विरासत स्थल के महत्व को याद करते हुए उसके नष्ट होने पर अफसोस जताया।
बर्लिन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दिप्तांशु सिन्हा ने कहा, "पटना कलेक्ट्रेट को ध्वस्त किया जाना केवल गलत निर्णय नहीं था, बल्कि साझा विरासत की बड़ी क्षति थी।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी से बिहार तथा देश के अन्य हिस्सों में बची डच कालीन विरासत इमारतों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
सिन्हा ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा होती रही है, लेकिन दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए इन संबंधों की सबसे ठोस अभिव्यक्ति उस दौर की विरासत इमारतों के रूप में दिखाई देती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों में बिहार सरकार ने पटना की कई ब्रिटिश कालीन सार्वजनिक इमारतों को हटाया और वर्ष 2022 में डच कालीन पटना कलेक्ट्रेट को भी ध्वस्त कर दिया, जबकि इसे संरक्षित कर सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता था।
पटना के विरासत विशेषज्ञों ने भी माना कि पुराने कलेक्ट्रेट परिसर के ध्वस्तीकरण के साथ शहर का एक बड़ा 'डच संबंध' समाप्त हो गया।
सिन्हा 'सेव हिस्टोरिक पटना कलेक्ट्रेट' अभियान से जुड़े रहे, जिसने छह वर्षों तक इस ऐतिहासिक परिसर को बचाने के लिए संघर्ष किया था।
कलेक्ट्रेट भवन को ध्वस्त करने से नष्ट हुई अन्य प्रमुख इमारतों में ब्रिटिश कालीन जिलाधिकारी कार्यालय भवन, डच कालीन जिला अभियंता कार्यालय भवन, एसडीओ कार्यालय भवन और भूमि अधिग्रहण कार्यालय भवन शामिल थे।
वर्ष 2020 में पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रिकॉर्ड रूम भवन के अग्रभाग के आठ स्तंभों को बचा लिया गया था। इन्हें दिसंबर 2024 में उद्घाटित नए कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शित किया गया।
पटना कलेक्ट्रेट संरक्षण के समर्थक डच इतिहासकार लेनार्ट बेस ने कहा कि भारत और नीदरलैंड के बीच नयी रणनीतिक साझेदारी से भारत में डच विरासत के प्रति अधिक जागरूकता पैदा होगी और भविष्य में ऐसी धरोहरों को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि पटना कलेक्ट्रेट के साथ जो हुआ, वैसा दोबारा नहीं होना चाहिए।
वर्ष 2016 में भारत में तत्कालीन डच राजदूत अल्फोंसस स्टोलिंगा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर पटना कलेक्ट्रेट को ध्वस्त नहीं करने की अपील की थी और इसे भारत तथा नीदरलैंड की 'साझा निर्मित विरासत' बताया था।
उन्होंने पत्र में लिखा था कि भारत-डच इतिहास को दर्शाने वाली इस विरासत को संरक्षित कर वैकल्पिक उपयोगों के लिए विकसित किया जा सकता है और राज्य पुरातत्व विभाग के नियमों के तहत इसे सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
पटना में डच काल के अवशेषों में अब पुराने पटना कॉलेज का प्रशासनिक भवन और गुलजारबाग स्थित सरकारी प्रेस की पुरानी संरचनाएं ही प्रमुख रूप से बची हैं।
पटना स्थित लेखक और शोधकर्ता प्रबुद्ध दास ने कहा, "हमने पटना कलेक्ट्रेट जैसा नगीना खो दिया और उसके बाद कई अन्य विरासत संरचनाएं भी खत्म हो गईं। अब जो धरोहर बची है, उसके संरक्षण के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।"
भाषा रवि कांत रवि कांत संतोष
संतोष
1805 1952 दिल्ली/पटना