ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में प. एशिया संकट पर चर्चा की उम्मीद, अराघची लेंगे हिस्सा
संतोष
- 12 May 2026, 11:47 PM
- Updated: 11:47 PM
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) भारत में बृहस्पतिवार से आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में पश्चिम एशिया में बढ़ता संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे इसके प्रभाव के मुद्दे के चर्चा का प्रमुख विषय रहने की उम्मीद है।
कई हफ्तों की अनिश्चितता को समाप्त करते हुए ईरान के दूतावास ने मंगलवार को पुष्टि की कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के लिए नयी दिल्ली की यात्रा करेंगे। 28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान से भारत की यह पहली उच्च स्तरीय यात्रा होगी।
ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन इसके सदस्य देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अराघची विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्रिक्स बैठक में भाग लेने वाले अन्य मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा ब्रिक्स बैठक के समय से मेल खाती है और वांग की बीजिंग में उपस्थिति आवश्यक है।
चीन ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत में चीन के राजदूत शी फीहोंग विदेश मंत्री वांग की ओर से बैठक में शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार, रूस के सर्गेई लावरोव सहित कई ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने पहले ही नयी दिल्ली में आयोजित हो रही बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है।
भारत, ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए, सितंबर में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विदेश मंत्रियों का यह सम्मेलन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर सर्वसम्मति वाला कोई बयान जारी कर पाता है।
पिछले महीने ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अमेरिका मामलों के विशेष दूतों की बैठक के दौरान, ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच तीखे मतभेदों के कारण भारत द्वारा संघर्ष पर सर्वसम्मति बनाने के प्रयास विफल रहे।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच मतभेदों के कारण संघर्ष पर कोई सर्वसम्मति वाला बयान जारी नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में, दोनों पड़ोसी देशों के बीच यूएई में ऊर्जा अवसंरचना पर ईरान के कथित हमलों को लेकर तीखी बहस हुई है।
सूत्रों के अनुसार, ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव को लेकर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद, ईरान ने ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत से आग्रह किया कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी ''स्वतंत्र भूमिका'' का उपयोग करे।
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से का परिवहन होता है।
ब्रिक्स समूह में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, लेकिन 2024 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।
यह एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
ब्रिक्स बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया, "ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधिमंडल प्रमुख बैठक में भाग लेंगे। वे भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।"
मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री "आपसी हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों" पर विचार-विमर्श करेंगे।
ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देश 15 मई को "ब्रिक्स 20: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" विषय पर एक सत्र में भाग लेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद "वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार" पर एक सत्र होगा।
ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने अपनी पिछली बैठक पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए 80) के 80वें सत्र के दौरान की थी।
वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की भावी अध्यक्षता के रूप में भारत ने उस बैठक की अध्यक्षता की थी।
भाषा सुरभि संतोष
संतोष
1205 2347 दिल्ली