बेअदबी रोधी कानून को लेकर अकाल तख्त जत्थेदार ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी
माधव
- 08 May 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
अमृतसर, आठ मई (भाषा) अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने शुक्रवार को पंजाब सरकार को बेअदबी रोधी कानून से उन प्रावधानों को हटाने के लिए 15 दिन की समय सीमा दी, जो ''गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ हैं।''
शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां यहां जत्थेदार के समक्ष पेश हुए।
जत्थेदार ने उनसे पूछा कि बेअदबी रोधी अधिनियम पारित करने से पहले पंथ से परामर्श क्यों नहीं किया गया।
जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 को पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल को ध्वनिमत से पारित कर दिया था। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अपमान के कृत्य के लिए आजीवन कारावास सहित कठोर दंड का प्रावधान है।
जत्थेदार के समक्ष पेश होने के बाद, संधवां ने बैठक के बारे में कोई खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा, ''हम पंथ के प्रति प्रतिबद्ध हैं और उसकी भावनाओं के अनुरूप कार्य करेंगे। जो कुछ भी किया गया है वह पंथ की भावनाओं के अनुसार ही किया गया है।''
श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने कानून के संबंध में विस्तृत चर्चा की और जत्थेदार ने सिख संस्थानों, पंथिक विद्वानों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य सिख संगठनों द्वारा कानून के संबंध में उठाई गई आपत्तियों पर अध्यक्ष से जवाब मांगा।
विचार-विमर्श के बाद, गड़गज ने संधवां से कहा कि सरकार को 15 दिनों के भीतर अधिनियम से उन प्रावधानों को हटाना होगा जो गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत (सिख समुदाय) की भावनाओं के विरुद्ध हैं, और जिन्हें सिख संस्थानों से परामर्श किए बिना कानून में शामिल किया गया था।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधानों के कारण, यह कानून श्री अकाल तख्त साहिब और खालसा पंथ को स्वीकार्य नहीं है, इसलिए सरकार को इसे सिखों पर जबरदस्ती नहीं थोपना चाहिए।
संधवां ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब को धर्म का अपमान करने के दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
गड़गज ने कहा कि अधिनियम में संशोधन का मसौदा 11 अप्रैल की रात को तैयार किया गया और महज दो दिनों के भीतर 13 अप्रैल को पारित कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो कोई मसौदा सार्वजनिक रूप से जारी किया और न ही सिख संगत और संस्थानों से आपत्तियां मांगी, बल्कि बिना किसी चर्चा के ''गुप्त रूप से'' संशोधन को लागू कर दिया।
उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को कोई मसौदा नहीं भेजा गया।
भाषा सुभाष माधव
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