2024 में दिल्ली में जेलों में स्वीकृत संख्या से दोगुने कैदी बंद थे: एनसीआरबी
माधव
- 08 May 2026, 09:29 PM
- Updated: 09:29 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) दिल्ली की जेलों में 2024 में 19,512 कैदी बंद थे जबकि इन कारागारों की क्षमता 10,026 बंदियों को ही रखने की है। इनमें 88 फीसदी विचाराधीन कैदी थे। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के कारागार सांख्यिकी 2024 से यह जानकारी मिली।
आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी की जेलों में 858 कैदी उम्र कैद की सज़ा काट रहे हैं जबकि 12 कैदियों को मौत की सज़ा मिली है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट में राजधानी में कैदियों की प्रोफाइल, अपराध की श्रेणियां और जेलों में कैदियों की संख्या का विस्तृत विवरण उपलब्ध है। वर्ष 2024 में जेलों में 18,758 पुरुष, 743 महिलाएं और 11 उभयलिंगी व्यक्ति बंद थे।
दिल्ली में 14 केंद्रीय कारागार और दो महिला कारागार हैं। इनमें 2,232 दोषी, 17,178 विचाराधीन कैदी, एहतियाती तौर पर हिरासत में लिए गए 12 बंदी और "अन्य" श्रेणी में रखे गए 90 कैदी शामिल हैं।
जेल में बंद कुल कैदियों में 88 प्रतिशत विचाराधीन थे, जबकि दोषी ठहराए गए कैदी 11.4 प्रतिशत थे।
शिक्षा के लिहाज से किए गए विश्लेषण से पता चला कि दिल्ली की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों का बड़ा हिस्सा 10वीं कक्षा तक ही पढ़ा है। आंकड़ों से पता चला कि 17,178 विचाराधीन कैदियों में से 6,949 कैदी इस श्रेणी में आते हैं, जबकि 4,657 निरक्षर थे।
रिपोर्ट के अनुसार, अन्य 1,470 विचाराधीन कैदी स्नातक थे, 225 स्नातकोत्तर थे और 160 के पास तकनीकी डिग्री या डिप्लोमा थे, जबकि 317 ने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी लेकिन स्नातक की डिग्री हासिल नहीं की थी।
सजा की अवधि से संबंधित आंकड़ों से पता चला कि दिल्ली की जेलों में बंद कैदियों में आजीवन कारावास सबसे आम सजा थी।
कुल 858 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिली हुई थी, जबकि 413 दोषियों को 10 से 13 साल के बीच की सजा मिली हुई थी। अन्य 348 दोषियों को सात से नौ साल के बीच की सजा काट रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक दिल्ली की जेलों में बंद 12 ऐसे कैदी थे जिन्हें मौत की सज़ा मिली थी।
दोषियों में से 1,567 दिल्ली के निवासी थे, जबकि 626 अन्य राज्यों से और 39 विदेशी नागरिक थे। विचाराधीन कैदियों में से 12,522 दिल्ली के निवासी थे, 3,979 अन्य राज्यों के थे और 677 विदेशी नागरिक थे।
आयु के अनुसार आंकड़ों से पता चला कि दिल्ली की जेलों में बंद अधिकांश दोषी 30-50 वर्ष आयु वर्ग के थे। विचाराधीन कैदियों में की बात करें तो 9,938 कैदी 18-30 वर्ष आयु वर्ग के थे जो 57.9 फीसदी होता है।
दिल्ली की जेलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में दोषी ठहराए गए 461 कैदी बंद थे, जिनमें बलात्कार के 400, लज्जा भंग करने के 33 और दहेज हत्या के 21 दोषी शामिल थे। इसके अलावा हत्या के लिए दोषी ठहराए गए 792 और हत्या की कोशिश के लिए दोषी ठहराए गए 129 कैदी थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 तक दिल्ली की जेलों में कुल 724 विदेशी कैदी बंद थे, जिनमें 677 विचाराधीन कैदी, 39 दोषी और आठ एहतियात के तौर पर हिरासत में लिए गए थे। इनमें से 587 पुरुष और 137 महिलाएं थीं।
विदेशी कैदियों की श्रेणी में पाकिस्तान के 13 नागरिकों को दोषी ठहराया गया है जो सबसे ज्यादा संख्या है। इसके बाद नाइजीरियाई नागरिकों की संख्या सात और अन्य अफ्रीकी नागरिकों की संख्या पांच थी।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव
0805 2129 दिल्ली