भाजपा बंगाल के बाद पंजाब में भी 'भय और विभाजन की राजनीति' की पुनरावृत्ति कर रही: मान
धीरज
- 08 May 2026, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
(तस्वीरों के साथ)
बठिंडा, आठ मई (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि अगले होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनाई गई 'भय और विभाजन की राजनीति' को यहां भी दोहराने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इस कोशिश के पीछे की मंशा समुदायों को आपस में बांटकर सत्ता हथियाना है।
उन्होंने पंजाबियों से राज्य की शांति, सौहार्द और सांप्रदायिक सद्भाव के शत्रु विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि सांप्रदायिक राजनीति को पंजाब के सदियों पुराने भाईचारे को भंग करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अपनी 'शुकराना यात्रा' के तीसरे दिन की शुरुआत बठिंडा से की और तख्त श्री दमदमा साहिब में मत्था टेका।
वह राज्य में लागू किए गए बेअदबी विरोधी कानून के प्रति "आभार" जताने के लिए चार दिवसीय राज्यव्यापी यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं।
मान ने कहा कि वह ईश्वर के ऋणी हैं, जिन्होंने उन्हें जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम 2026 को लागू करके मानवता की सेवा करने का अवसर प्रदान किया है। इस अधिनियम में बेअदबी के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
मान ने भाजपा पर करारा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में आजमाई गई वही ''भय और विभाजन की राजनीति'' अब पंजाब में भी दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें समाज का ध्रुवीकरण करने और सत्ता हथियाने के लिए समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने 'पंजाब पंजाबियों का है' का नारा लगाते हुए कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करने वाले पंजाब के दुश्मन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल में विभाजनकारी राजनीति के जरिये सत्ता हासिल की, लेकिन पंजाब में ऐसी साजिशें कभी सफल नहीं होंगी क्योंकि यहां के लोग हर त्योहार एक साथ मनाते हैं।
उन्होंने कहा, ''सांप्रदायिक दल पंजाब की भाईचारा की संस्कृति को भंग करने की साजिश रच रहे हैं और उनके इस खतरनाक एजेंडे के सफल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।''
मान ने पश्चिम बंगाल का सदंर्भ देते हुए दावा किया कि वहां भाजपा के सत्ता में आने के बाद स्थिति "काफी बिगड़ गई" और निर्दोष लोगों के घर जलाए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, "जैसे ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनी, पूरे राज्य में डर का माहौल छा गया। अब पंजाब के लिए भी वही साजिश रची जा रही है।"
मान ने कहा, "पहले वे दो समुदायों को आपस में लड़ाते हैं, फिर एक पक्ष के साथ खड़े होकर दूसरे को डराते हैं ताकि वोट हासिल कर सकें।"
राष्ट्रीयता के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस ने 52 वर्षों तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, लेकिन आज वही लोग दूसरों को देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांट रहे हैं।
उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों ने देश के लिए अनगिनत बलिदान दिए हैं और उन्हें स्वयंभू देशभक्तों से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।"
विभाजन का जिक्र करते हुए मान ने कहा कि उस दर्दनाक दौर में पंजाब ने सबसे अधिक पीड़ा झेली और करीब 10 लाख पंजाबियों ने अपनी जान गंवाई, जबकि आज पंजाब की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाले लोगों ने देश के लिए ऐसा कोई बलिदान नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ नेता उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं, जबकि पंजाबियों ने देश के लिए लगभग 90 प्रतिशत बलिदान दिए हैं और अब उन्हें ही "गद्दार" कहा जा रहा है।
मान ने आरोप लगाया, "देश के लिए सबसे अधिक कुर्बानी देने वाले पंजाबियों को अब भाजपा राष्ट्रविरोधी बता रही है।"
विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सुनिल जाखड़ जैसे नेताओं को आत्ममंथन करने की जरूरत है क्योंकि वे एक सामान्य परिवार के बेटे को ईमानदारी से पंजाब की सेवा करते नहीं देख पा रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों दल दशकों तक पंजाब की संपत्ति लूटते रहे और आम लोगों के कल्याण की अनदेखी करते रहे।
मान ने कहा, "विपक्षी दल पंजाब को फिर लूटने का मौका मांग रहे हैं, लेकिन अब जनता उन्हें सत्ता में नहीं बल्कि जेल भेजेगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि सुखबीर सिंह बादल दोबारा सत्ता में आने के सपने देख रहे हैं, लेकिन पंजाब की समझदार जनता उन लोगों को फिर कभी वोट नहीं देगी जिन्होंने बार-बार राज्य के साथ विश्वासघात किया।
भाषा
राखी धीरज
धीरज
0805 1918 बठिंडा