एनआईए मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की स्थापना का आदेश
अविनाश
- 08 May 2026, 07:14 PM
- Updated: 07:14 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि उन मामलों में लंबित 10 से 15 मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए कम से कम एक विशेष अदालत स्थापित की जाए, जिनकी जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) कर रही है।
शीर्ष अदालत ने ऐसे मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कई निर्देश जारी किए, जिनमें एनआईए के माध्यम से केंद्र सरकार अभियोजक है। उसने स्पष्ट किया कि विशेष अदालतों की स्थापना एक महीने के भीतर की जानी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र को संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने और एनआईए अधिनियम-2008 की धारा-11 के तहत विशेष अदालतों की स्थापना के लिए परामर्श करने का निर्देश दिया।
एनआईए अधिनियम की धारा-11 विशेष अदालतों की स्थापना करने की केंद्र सरकार की शक्तियों से संबंधित है।
पीठ ने कहा, "हम उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे राज्य सरकारों से परामर्श कर विशेष अदालतों की स्थापना के लिए आवश्यक एवं पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराएं, जहां पीठासीन अधिकारियों को मामलों की सुनवाई का जिम्मा सौंपा जाएगा।"
पीठ "विशेष न्यायालयों का सृजन'' संबंधी स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।
उसने स्पष्ट किया कि विशेष अदालतों को एनआईए मामलों के अलावा कोई अन्य मामले नहीं सौंपे जाएंगे और सुनवाई दैनिक आधार पर की जाएगी।
पीठ ने कहा कि विशेष अदालत के न्यायाधीशों को यह सुनिश्चित करते हुए मामलों को अपनी इच्छानुसार सूचीबद्ध करने की छूट होगी कि कम से कम एक मुकदमे की सुनवाई एक महीने के भीतर पूरी हो जाए।
उसने कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि 10 से 15 लंबित मुकदमों के लिए कम से कम एक विशेष अदालत होगी।"
पीठ ने कहा कि अगर लंबित मुकदमों की संख्या 15 से अधिक है, तो दो विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी।
न्यायालय ने राज्यों को अपने पिछले आदेश पर अमल करने का निर्देश दिया, जिसमें कहा गया था कि उनके लिए विशेष अदालतों की स्थापना के लिए जरूरी कक्ष और अन्य बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
पीठ ने एनआईए अधिनियम की धारा-22 के तहत दर्ज मामलों से जुड़े मुकदमों के मुद्दे पर भी विचार किया, जिनमें राज्य अभियोजक होता है।
एनआईए अधिनियम की धारा-22 राज्य सरकार को विशेष अदालत स्थापित करने की शक्ति प्रदान करती है।
शीर्ष अदालत ने राज्यों के महाधिवक्ताओं से उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल के परामर्श से अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित मुकदमों का विवरण पेश करने को कहा।
उसने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले, न्यायालय ने 20 अप्रैल को सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को आतंकवाद और मादक पदार्थों से जुड़े उन मामलों का ब्योरा देने को कहा था, जिनकी जांच एनआईए और स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) सहित अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियां कर रही हैं, ताकि मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों की स्थापना की दिशा में कदम उठाया जा सके।
उसने केंद्र से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में अदालतें स्थापित करने के वास्ते एक-एक करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराने पर विचार करने को भी कहा था।
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश
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