छत्तीसगढ़ के कांकेर में माओवादियों के बारूद के ढेर में धमाका, चार पुलिसकर्मी शहीद
सं, संजीव रवि कांत
- 02 May 2026, 11:02 PM
- Updated: 11:02 PM
कांकेर, दो मई (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में माओवादियों द्वारा पहले से छिपाए गए बारूद के एक ढेर को नष्ट करने की कोशिश के दौरान हुए धमाके में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के एक निरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
राज्य को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किए जाने के बाद नक्सल गतिविधियों से जुड़ी विस्फोट की यह पहली घटना है।
यह इस साल का भी पहला ऐसा मामला है जिसमें नक्सल विरोधी अभियानों में जुटे सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस ने पहले कहा था कि एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) में धमाके के कारण यह घटना हुई है।
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि यह धमाका पूर्वाह्न करीब 11.30 बजे छोटेबेठिया पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाले आदनार गांव के जंगल इलाके में, नारायणपुर जिले की सीमा के पास हुआ। उस समय सुरक्षाकर्मियों का एक संयुक्त दल, नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए अभियान पर निकला था।
सुंदरराज ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी कैडरों से प्राप्त जानकारी तथा अन्य सूचना के आधार पर बस्तर क्षेत्र में माओवादियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए सैकड़ों आईईडी को पुलिस और सुरक्षाबलों ने बरामद कर निष्क्रिय कर दिया है।
उन्होंने बताया कि शनिवार का अभियान छोटेबेठिया इलाके में माओवादियों द्वारा छोड़ दिये गये सामानों (डंप) के बारे में मिली इसी तरह की जानकारियों के बाद शुरू किया गया था।
अधिकारी ने बताया कि डीआरजी के नेतृत्व वाले इस दल में बस्तर फाइटर्स और जिला बल के जवान भी शामिल थे।
उन्होंने बताया कि कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने आज घटनास्थल का निरीक्षण किया।
अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल निरीक्षण तथा अभियान में शामिल सुरक्षा बलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम दृष्टया ये प्रतीत हो रहा है कि माओवादी द्वारा पूर्व में डंप किए गए सामानों को बरामद करने के लिए जारी अभियान के दौरान पहले कंप्यूटर, मॉनिटर, प्रिंटर आदि बरामद किया गया। बाद में उसके समीप एक अन्य डंप में माओवादी द्वारा पूर्व में छिपाए गए 15-15 किलोग्राम के पांच बोरी पटाखा पाउडर (गनपॉवडर- पोटेशियम नाइट्रेट और बेरियम नाइट्रेट से बना बारूद) को बरामद किया गया तथा बीडीएस टीम की सहायता से दल प्रभारी और अन्य सदस्य उसे डंप से बाहर निकाल कर सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की तैयारी कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि इस दौरान संभवतः अधिक तापमान और रासायनिक क्रिया के कारण पटाखा पाउडर में विस्फोट हुआ, जिससे अत्यधिक जलने और विस्फोट से संबंधित शॉक के कारण घटना स्थल पर तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।
सुंदरराज ने बताया कि धमाके का सही कारण पता लगाने के लिए विस्तृत बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच चल रही है।
अधिकारी ने बताया कि इस घटना में शहीद डीआरजी के निरीक्षक सुखराम वट्टी (40), दल का नेतृत्व कर रहे थे। उनके साथ जिला बल के आरक्षक कृष्णा कोमरा (35) और बस्तर फाइटर्स के आरक्षक संजय गढ़पाले (29) की भी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
उन्होंने बताया कि इस घटना में घायल हुए बस्तर फाइटर्स के एक आरक्षक परमानंद कोर्राम (29) को हवाई मार्ग से रायपुर ले जाया गया था, लेकिन वहां अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार निरीक्षक वट्टी बीजापुर जिले के रहने वाले थे, जबकि बाकी तीन जवान कांकेर जिले के थे।
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया, ''निरीक्षक वट्टी के नेतृत्व में इसी दल ने पूर्व अभियानों के दौरान माओवादी ठिकानों से कई आईईडी सफलतापूर्वक बरामद कर उन्हें सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया था। लेकिन आज की इस दुखद दुर्घटना में हमने अपने चार बहादुर कमांडो को कर्तव्य पालन के दौरान खो दिया। हम राष्ट्र की सेवा में कर्तव्य पालन करते हुए इन चारों वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान के प्रति सदैव ऋणी रहेंगे।''
उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटना को 'दुखद' बताया और कहा कि पूरी सरकार शहीद जवानों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
शर्मा ने नवा रायपुर में संवाददाताओं से कहा, ''उन्होंने डिवाइस को तय प्रक्रिया के अनुसार ही संभाला, लेकिन उसकी बनावट ऐसी थी कि उससे एक ज़ोरदार धमाका हो गया, जिसमें चार जवान शहीद हो गए। यह एक बहुत ही दुखद घटना है।''
शर्मा ने कहा, '' मैं ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। पूरी सरकार शोक संतप्त परिवारों के साथ मज़बूती से खड़ी है।"
छत्तीसगढ़ में 31 मार्च को नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा के बाद बारूदी सुरंग विस्फोट में जवानों की मौत की यह पहली घटना है।
राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, खासकर बस्तर क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों ने पूर्व में बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं, जो अब भी वहां तैनात सुरक्षाबलों और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षाबल के जवान क्षेत्र में लगातार बारूदी सुरंगों की तलाश और उन्हें निष्क्रिय करने की कार्रवाई में जुटे हुए हैं।
भाषा
सं, संजीव रवि कांत
0205 2302 कांकेर