सरकार को अपनी ही कमियों के पीछे छिपने की अनुमति नहीं दी जा सकती: उच्चतम न्यायालय
नरेश
- 17 Apr 2026, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार की उस बेतुकी दलील को शुक्रवार को ''चौंकाने वाला और चिंताजनक'' बताया जिसमें उसने यह कहते हुए असमर्थता जताई थी कि उसके वन अधिकारियों के पास रेत माफिया के हथियारों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त शस्त्र नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि सरकार को ''विवशता का बहाना'' बनाने या अपनी ही कमियों के पीछे छिपने की अनुमति नहीं दी जा सकती, विशेष रूप से तब जब इन्हीं कमियों के कारण हिंसा, मानव जीवन की हानि और गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण पर्यावासों का नुकसान होता है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 'राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों के लिए खतरा' शीर्षक वाले मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए ये टिप्पणियां कीं।
पीठ ने कहा, ''इससे भी अधिक चौंकाने वाली और चिंताजनक बात यह है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष दायर एक हलफनामे में मध्य प्रदेश राज्य की ओर से कहा गया है कि वन अधिकारियों के पास उन रेत माफिया से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण, विशेष रूप से पर्याप्त हथियार नहीं हैं, जो कथित तौर पर उन्नत हथियारों और आधुनिक वाहनों से लैस हैं।''
इसने कहा कि यह खुलासा निष्क्रियता को उचित ठहराने के अलावा, गैरकानूनी और संगठित अवैध खनन गतिविधियों से निपटने में राज्य तंत्र की ओर से संस्थागत इच्छाशक्ति की कमी को उजागर करता है।
पीठ ने कहा कि यह मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों की ओर से उनके मूलभूत संवैधानिक दायित्वों - सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के प्रति पूर्ण और स्पष्ट उदासीनता को दर्शाता है, जिनका आम जनता और संबंधित पारिस्थितिकी तंत्र पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
इसने कहा, ''कानून लागू करने वाले कर्मियों को पर्याप्त उपकरण उपलब्ध कराने और आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता शासन और कानून के शासन की नींव पर ही प्रहार करती है।''
पीठ ने कहा कि वह यह कहने के लिए विवश है कि इस तरह का दृष्टिकोण न केवल अपराध करने वालों को प्रोत्साहित करता है बल्कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने की राज्य की क्षमता में जनता के विश्वास को भी कम करता है, जिससे प्रशासन के उच्चतम स्तर पर तत्काल, ठोस और जवाबदेह सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता होती है।
इसने कहा, ''इसके परिणामस्वरूप न्यायालय का यह मत है कि सबसे पहला और आवश्यक कदम निगरानी और पर्यवेक्षण ढांचे को मजबूत करना है ताकि अवैध रेत खनन गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।''
अदालत ने कहा कि इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को जारी रहने से रोकने और प्रभावित क्षेत्रों में कानून के शासन को बहाल करने के लिए एक मजबूत, समन्वित और प्रौद्योगिकी-संचालित तंत्र आवश्यक है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दो अप्रैल को स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई के दौरान, उसने एनजीटी के समक्ष लंबित मामले को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था।
इसने अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन से निपटने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने समेत कई निर्देश पारित किये।
पीठ ने कहा कि उसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों से अवैध खनन से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी उपाय करने की उम्मीद है और ऐसा नहीं होने पर अदालत को अर्धसैनिक कर्मियों की तैनाती समेत उचित निर्देश जारी करने के लिए अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
इसने कहा कि यदि ये राज्य ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं, तो अदालत मध्य प्रदेश और राजस्थान में रेत खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और महत्वपूर्ण पर्यावासों और सभी प्रकार के जीवन को बनाए रखने तथा पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने में विफल रहने के लिए राज्यों पर भारी जुर्माना लगाने का निर्देश दे सकती है।
पीठ ने कहा, ''अगली सुनवाई की तारीख तक प्रभावी और सकारात्मक कदम न उठाए जाने की स्थिति में, इस न्यायालय को स्थिति से निपटने के लिए तत्काल और कड़े निर्देश पारित करने के लिए विवश होना पड़ेगा।'
न्यायालय ने मामले में सुनवाई की अगली तिथि 11 मई तय की।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है। लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण तीनों राज्यों का संरक्षित क्षेत्र है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा रेखा के पास चंबल नदी पर स्थित यह अभयारण्य सर्वप्रथम 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह तीनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रशासित एक लंबा और संकरा अभयारण्य है।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश
1704 1940 दिल्ली