ईरान में गिरे अमेरिकी लड़ाकू विमान के चालक दल के एक सदस्य को बचाया गया: सूत्र
प्रशांत
- 03 Apr 2026, 11:14 PM
- Updated: 11:14 PM
दुबई, तीन अप्रैल (एपी) ईरान में एक अमेरिकी विमान को 'मार गिराये' जाने के बाद चालक दल के एक सदस्य को बचा लिया गया है। अमेरिकी एवं इजराइली अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इससे पहले, इस घटनाक्रम से अवगत तीन अधिकारियों ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि यह बचाव ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी सेना तलाश एवं बचाव अभियान चला रही थी। इजराइल इस तलाश एवं बचाव अभियान में अमेरिका की मदद कर रहा है।
एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को पेंटागन (अमेरिका रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय) से प्राप्त एक ईमेल के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसे पश्चिम एशिया में ''एक विमान को मार गिराए जाने'' की सूचना मिली थी। ईमेल में इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई।
अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस घटनाक्रम के बारे में जानकारी दे दी गई है, लेकिन उन्होंने इससे अधिक कोई और ब्यौरा नहीं दिया।
यह पहली बार है जब अमेरिका ने ईरानी क्षेत्र में कोई विमान खोया है। इससे पांच सप्ताह पहले शुरू हुए युद्ध के दायरे में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी का संकेत मिलता है। यह स्पष्ट नहीं है कि विमान को मार गिराया गया या वह दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
इससे पहले, ईरानी सरकारी टेलीविज़न से जुड़े एक चैनल ने शुक्रवार को दावा किया कि एक अमेरिकी लड़ाकू पायलट दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊपर एक विमान से कूद गया।
ईरानी चैनल के एंकर ने लोगों से आग्रह किया था कि वे किसी भी ''दुश्मन पायलट'' को पुलिस के हवाले कर दें और ऐसा करने वाले व्यक्ति को इनाम दिया जाएगा। यह चैनल कोहकिलौयेह और बोयर-अहमद प्रांत में स्थित है, जो एक बेहद ग्रामीण और पहाड़ी इलाका है तथा 15,500 वर्ग किलोमीटर (5,900 वर्ग मील) क्षेत्र में फैला हुआ है।
अधिकारियों ने जनता से पड़ोसी प्रांत चहारमहल और बख्तियारी में भी पायलट की तलाश करने का आग्रह किया था।
इससे पहले, टीवी स्क्रीन पर लोगों से आग्रह किया गया कि ''अगर वे दिखें, तो गोली मार दें।'' यह बात सोशल मीडिया पर जारी उन वीडियो फुटेज के संदर्भ में कही गई, जिसमें उस इलाके में अमेरिकी विमान जैसा दिखने वाला विमान नजर आता है।
चैनल ने घोषणा करते समय एक ट्रक के पिछले हिस्से में धातु का मलबा दिखाया, लेकिन तत्काल कोई अन्य विवरण नहीं दिया।
पूरे युद्ध के दौरान, ईरान ने दुश्मन विमानों को मार गिराने के बारे में कई दावे किए, जो बाद में सच साबित नहीं हुए। शुक्रवार को पहली बार ऐसा हुआ जब ईरान ने टेलीविज़न पर आकर जनता से एक संदिग्ध पायलट को खोजने की अपील की।
इस बीच, ईरान ने शुक्रवार को समूचे पश्चिम एशिया में कई ठिकानों पर हमले किए, जिससे कुवैत में समुद्री पानी को पेयजल में बदलने वाला एक विलवणीकरण संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया और एक रिफाइनरी में आग लग गई। वहीं, अमेरिका और इजराइल ने हवाई हमले कर तेहरान को निशाना बनाया।
अमेरिका और इजराइल ने कहा था कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने इजराइल और अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर दबाव बनाए रखा है।
इस बात के संकेत के तौर पर कि ईरान की धर्म-आधारित शासन व्यवस्था का एक हिस्सा बातचीत के लिए तैयार हो सकता है, देश के पूर्व शीर्ष राजनयिक ने एक प्रभावशाली अमेरिकी पत्रिका में संघर्ष को समाप्त करने का एक प्रस्ताव प्रकाशित किया है।
खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे पर ईरान के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी मजबूत पकड़ ने शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल मचा दी है, तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है और भोजन सहित कई बुनियादी चीज़ों की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि शांतिकाल में दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस परिवहन का पांचवां हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने शुक्रवार को लिखा कि अब दोनों पक्षों की तकलीफ़ों को खत्म करने का समय आ गया है।
ज़रीफ़ पश्चिमी देशों के साथ बातचीत का लंबा अनुभव रखने वाले एक मंझे हुए राजनयिक हैं और ईरानी नेतृत्व के एक व्यावहारिक खेमे के करीब माने जाते हैं।
उन्होंने 'फॉरेन अफेयर्स' पत्रिका में लिखा, ''लंबे समय तक चलने वाली शत्रुता से कीमती जानें और अमूल्य संसाधन कहीं ज़्यादा बर्बाद होंगे।''
ज़रीफ़ ने ही विश्व शक्तियों के साथ ईरान के 2015 के परमाणु समझौते से जुड़ी बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी।
उन्होंने लिखा, ''ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर बंदिशें लगाने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का प्रस्ताव देना चाहिए, जिसके बदले उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएं- यह एक ऐसा सौदा है, जिसे वाशिंगटन पहले स्वीकार नहीं करता, लेकिन अब शायद मान ले।''
तेहरान और वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत कर रहे थे, तभी 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने बमबारी शुरू कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब अमेरिका ने उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान हमला किया है।
हमलों के क्रम में ईरान ने कुवैत की मीना अल-अहमदी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। युद्ध के दौरान इस प्रतिष्ठान को कई बार निशाना बनाया गया है।
सरकारी स्वामित्व वाली कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि दमकलकर्मी कई जगहों पर लगी आग को बुझाने का काम कर रहे हैं।
कुवैत ने यह भी कहा कि ईरान के हमले से एक विलवणीकरण संयंत्र को ''काफी नुकसान'' पहुंचा है। इस तरह के संयंत्र खाड़ी देशों के लिए पेयजल की आपूर्ति करते हैं, और इन्हें इस युद्ध में प्रमुखता से निशाना बनाया जा रहा है।
इसके साथ ही बहरीन में भी सायरन बजने की आवाज सुनाई दी। वहीं, सऊदी अरब ने कहा कि उसने ईरान के कई ड्रोन नष्ट कर दिए।
उधर, संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने एक गैस क्षेत्र को बंद कर दिया, क्योंकि एक मिसाइल को रोके जाने के बाद उसका मलबा उस पर गिरा और आग लग गई।
कार्यकर्ताओं ने ईरान की राजधानी तेहरान और मध्य शहर इस्फ़हान के आसपास हमलों की जानकारी दी, लेकिन यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि किस चीज़ को निशाना बनाया गया।
इससे, एक दिन पहले ईरान ने कहा था कि अमेरिका ने एक बड़े पुल पर हमला किया, जो अभी निर्माणाधीन था और इस हमले में आठ लोगों की मौत हो गई।
युद्ध के दौरान ईरान में 1,900 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं। इज़राइल में 19 लोगों के मारे जाने की खबर है। खाड़ी देशों और कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में दो दर्जन से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि अमेरिका के 13 सैनिक मारे गए हैं।
वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल के जमीनी अभियान में 1,300 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 10 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। इस दौरान 10 इजराइली सैनिक भी मारे गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के शनिवार को बहरीन के एक प्रस्ताव पर मतदान करने की उम्मीद है, जो जहाजों का होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरना सुनिश्चित करने के लिए रक्षात्मक कार्रवाई को अधिकृत करेगा।
बहरीन के प्रारंभिक मसौदे में देशों को जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए ''सभी आवश्यक उपकरणों का उपयोग'' करने की अनुमति देने की बात कही गई थी, लेकिन वीटो शक्ति प्राप्त रूस, चीन और फ्रांस ने शक्ति के इस्तेमाल की मंजूरी देने का विरोध किया।
एपी सिम्मी प्रशांत
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