एआई संप्रभुता का मतलब दुनिया से अलग होकर सबकुछ खुद करना नहीं : सुनील गुप्ता
मनीषा
- 20 Feb 2026, 12:50 PM
- Updated: 12:50 PM
नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) योट्टा डेटा सर्विसेज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुनील गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) संप्रभुता का मतलब अलग-थलग पड़ना या पूर्ण आत्मनिर्भरता नहीं है, बल्कि रणनीतिक नियंत्रण है।
'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में गुप्ता ने जोर दिया कि प्रौद्योगिकी में परस्पर वैश्विक निर्भरता अपरिहार्य है।
उन्होंने कहा, "हम दुनिया भर में हमेशा परस्पर जुड़े और एक-दूसरे पर निर्भर रहेंगे।"
गुप्ता ने कहा कि कुछ देश चिप विनिर्माण में आगे होंगे, तो कुछ कच्चे माल, डेटा, मॉडल, प्रतिभा या पूंजी में उत्कृष्ट होंगे इसलिए "सहयोग आवश्यक है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि संप्रभुता का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ देश में ही बनाने की कोशिश की जाए या खुद को दुनिया से अलग कर लिया जाए। इसका मतलब यह सुनिश्चित करना है कि कोई एक देश या कंपनी किसी राष्ट्र के डिजिटल भविष्य को नियंत्रित न कर सके।
गुप्ता ने कहा, "संप्रभुता को अक्सर इस विचार से भ्रमित किया जाता है कि हम सब कुछ खुद करेंगे और दुनिया से अलग हो जाएंगे… लेकिन संप्रभुता का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम अलग-थलग पड़ जाएं और सब कुछ खुद करने लगें।"
उन्होंने कहा कि मुख्य कंप्यूटर अवसंरचना को राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर और घरेलू नियंत्रण में रखना बेहद महत्वपूर्ण है, "इन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अपने परिवेश और अपने नियंत्रण में करें।''
वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों जैसे एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन की प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए भी योट्टा ने यह सुनिश्चित किया कि पूरा प्रौद्योगिकी ढांचा भारत में संचालित और स्थानीय नियंत्रण में रहे।
इस बीच लार्सन एंड टुब्रो-व्योमा की मुख्य कार्यकारी सीमा अंबस्थ ने कहा कि संप्रभु क्षमता का निर्माण मजबूत एवं रणनीतिक साझेदारियां स्थापित करने से संभव है।
गौरतलब है कि योट्टा डेटा सर्विसेज ने राष्ट्रीय राजधानी के बाहर स्थापित किए जा रहे एक एआई कंप्यूटिंग हब में एनवीडिया के नवीनतम चिप पर दो अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च करने की बुधवार को घोषणा की थी।
योट्टा के मुंबई, गुजरात और ग्रेटर नोएडा में तीन डेटा सेंटर परिसर हैं।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
2002 1250 दिल्ली