दिल्ली सरकार की कर्ज देने वाली एजेंसी डीएफसी बंद, परिसमापन के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित
अजय
- 10 Feb 2026, 06:50 PM
- Updated: 06:50 PM
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) दिल्ली सरकार ने बढ़ते घाटे के चलते कर्ज देने वाली एजेंसी दिल्ली वित्त निगम (डीएफसी) को बंद कर दिया है और इसकी परिसमापन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नौ सदस्यीय समिति का गठन किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
डीएफसी के परिसमापन की अधिसूचना वित्त विभाग ने छह फरवरी को जारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि पिछले महीने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में इस संस्थान को बंद करने का निर्णय लिया गया था।
मझोली, लघु और सूक्ष्म परियोजनाओं को ऋण प्रदान करने वाली डीएफसी को जिन 'गंभीर वित्तीय कठिनाइयों' का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें पिछले वर्ष नवंबर में इसके निदेशक मंडल के सदस्यों की बैठक में उजागर किया गया था।
बोर्ड को सूचित किया गया था कि डीएफसी की शेयर पूंजी में भारी गिरावट आई है और 42 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। सितंबर, 2025 तक यह दिल्ली सरकार को देय 80 करोड़ रुपये के कुल बकाया ऋण को चुकाने की स्थिति में भी नहीं थी।
इसके अलावा, आधिकारिक दस्तावेजों से पता चला है कि निगम की संपूर्ण पूंजी और भंडार पूरी तरह से समाप्त हो गए थे और इसकी शुद्ध संपत्ति (नेटवर्थ) में 15 करोड़ रुपये की गिरावट आई थी।
वित्त विभाग ने बताया कि राज्य वित्त निगम अधिनियम, 1951 की धारा 45 के तहत दी गयी शक्तियों और इस संबंध में सक्षम अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के उपराज्यपाल ने डीएफसी को बंद करने का आदेश दिया है।
अधिसूचना में कहा गया, ''डीएफसी इस अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि (छह फरवरी, 2026) से बंद हो जाएगी।''
इसमें यह भी कहा गया है कि नए ऋणों की स्वीकृति समेत निगम के सभी परिचालन बंद कर दिए गए हैं।
अधिसूचना में कहा गया है कि राज्य वित्त सचिव की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय परिसमापन समिति को अब निगम के निदेशक मंडल की सभी शक्तियां प्राप्त हैं।
समिति डीएफसी की सभी परिसंपत्तियों, अभिलेखों, प्रतिभूतियों, नकदी, बैंक शेष, निवेश और संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर परिसमापन कार्य करेगी तथा बकाया वसूली, वसूली प्रक्रिया और वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करेगी।
भाषा रमण अजय
अजय
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