कानून को मानवीय यथार्थ के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए : मुआवजा बढ़ाते हुए न्यायालय ने कहा
प्रशांत
- 06 Feb 2026, 09:30 PM
- Updated: 09:30 PM
नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटना में मारे गए एक व्यक्ति के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाते हुए शुक्रवार को कहा कि कानून को मानवीय वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, खासकर उन मामलों में, जिनमें पारिवारिक संबंधों का अचानक टूटना शामिल होता है।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके शोकाकुल आश्रित जब मुआवजे के लिए आवेदन करते हैं, तो कोई भी धनराशि उस क्षति की वास्तविक भरपाई नहीं कर सकती।
पीठ ने कहा, ''मुआवजा कुछ और नहीं, बल्कि एक अनुमानित राशि होती है, जिसका उद्देश्य आश्रितों पर पड़े आर्थिक बोझ को कुछ हद तक कम करना होता है। किसी अपने का साथ छूट जाने की कीमत पैसों में तय करना असंभव है।''
अदालत ने कहा कि पति-पत्नी, संतान या माता-पिता से जुड़े मुआवजे का उद्देश्य केवल भावनात्मक शून्यता को स्वीकार करना होता है, लेकिन दी जाने वाली राशि कभी उस क्षति का सटीक मूल्य नहीं हो सकती।
पीठ ने कहा, ''यह तो अकल्पनीय को मापने/आंकने की कोशिश करने जैसा है।''
पीठ ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने "प्यार और स्नेह की हानि" को मुआवजे के एक अलग मद के रूप में मान्यता दी है, जो किसी प्रियजन की असमय मृत्यु पर परिवार के सदस्यों द्वारा झेली गई गैर-आर्थिक हानि को दर्शाता है।
इसने यह भी कहा कि एक अन्य मामले में संविधान पीठ ने इस दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया था।
पीठ ने कहा, ''न्यायिक अनुशासन के अनुसार संविधान पीठ का निर्णय छोटी पीठ के फैसले पर प्राथमिकता रखता है। इसलिए यह अदालत संविधान पीठ द्वारा घोषित कानून का पालन करने के लिए बाध्य है।''
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस बहिष्करण के पीछे मौजूद वैचारिक टकराव को नज़रअंदाज़ करना कठिन है।
पीठ ने सड़क दुर्घटना में 37-वर्षीय एक व्यक्ति की मृत्यु के मामले की सुनवाई करते हुए गौर किया कि चेन्नई स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मृतक के परिवार के सदस्यों को 9.37 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।
उस व्यक्ति की मौत जून 2011 में एक सड़क दुर्घटना में हुई थी। बाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने मुआवजा बढ़ाकर 10.51 लाख रुपये कर दिया।
इसके बाद मृतक के परिजनों ने और अधिक मुआवजे की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।
शीर्ष अदालत ने अपील की सुनवाई करते हुए मुआवजा बढ़ाकर 20.80 लाख रुपये कर दिया।
भाषा
सुरेश प्रशांत
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