भारत में एंटीबायोटिक का असर कम होने का मुख्य कारण दवाओं का अंधाधुंध उपयोग है : सरकार
मनीषा
- 03 Feb 2026, 05:26 PM
- Updated: 05:26 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सरकार ने मंगलवार को बताया वह देश भर में एंटीबायोटिक के असर कम होने के बढ़ते रुझान पर नजर रख रही है तथा एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और डॉक्टर के पर्चे के बिना इनके उपयोग को इसका एक प्रमुख कारण मान रही है।
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक प्रश्न के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के माध्यम से औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और इसके नियमों के प्रावधानों के तहत दवाओं की सुरक्षा, प्रभाव क्षमता और गुणवत्ता को नियंत्रित करती है।
उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियमों की अनुसूची एच और एच1 में शामिल किया गया है और इन्हें केवल पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे पर ही खुदरा बेचा जा सकता है।
जाधव ने कहा, "सरकार देश में एंटीबायोटिक का असर कम होने के बढ़ते रुझान से अवगत है, जिसमें निमोनिया/मूत्र मार्ग संक्रमण जैसे संक्रमणों में देखा गया प्रतिरोध भी शामिल है। सरकार ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और बिना डॉक्टर के पर्चे के इनके उपयोग को इसका एक प्रमुख कारण माना है।"
मंत्री ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रबंधन हेतु उठाए गए कई कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री विकसित की गई है और तथा जन जागरूकता एवं प्रसार के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की वेबसाइट पर इसे अपलोड किया गया है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) जारी किए हैं, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकृत हैं।
जाधव ने कहा कि सरकार ने संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण पर दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को कम करने के लिए स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित संक्रमणों की रोकथाम और नियंत्रण करना है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में जेनेरिक दवाओं के पर्चे को सुनिश्चित करने और पर्चों की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा किा पर्चों की नियमित समीक्षा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के तहत प्रमाणन प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तों में से एक है।
भाष्ज्ञाा
माधव मनीषा
मनीषा
0302 1726 दिल्ली