सांसदों और अन्य लोगों को आतंकित करना स्वीकार्य नहीं: दिल्ली पुलिस
संतोष
- 02 Feb 2026, 06:32 PM
- Updated: 06:32 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) संसद सुरक्षा उल्लंघन के वर्ष 2023 के मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए पुलिस ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि संसद के अंदर धुआं छोड़ने वाले कनस्तरों में ज्वलनशील पदार्थ ले जाना और सांसदों के "मन को आतंकित करना" किसी भी तरह से माफ नहीं किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि मनोरंजन डी और सागर शर्मा "उच्च स्तरीय" साजिश में "मुख्य भूमिका निभाने वाले" थे और उनके कार्यों ने अराजकता पैदा की, जिसका टेलीविजन पर सीधा प्रसारण देखा गया।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ आरोपी मनोरंजन डी, शर्मा और ललित झा की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पुलिस के वकील ने कहा, "देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरा था। उन्होंने सांसदों, कर्मचारियों और इसे देखने वालों के मन को आतंकित किया।"
दिल्ली पुलिस के वकील ने आगे कहा कि आरोपियों के पास मौजूद पर्चों में प्रधानमंत्री को "खुली धमकी" दी गई थी और उनका इरादा "सत्ता हथियाना" था।
उन्होंने कहा कि ज्वलनशील पदार्थ से भरे धुएं के कनस्तरों का उपयोग करना और सदन में कूदना किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरोपी को रिहा कर दिया जाता है, तो वह उन महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावित कर सकता है, जिनकी अभी जांच होनी बाकी है, और मुकदमे में शामिल होने से भाग भी सकता है।
हालांकि, आरोपी के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय इस मामले में दो सह-आरोपियों को पहले ही जमानत दे चुका है।
उन्होंने अदालत से तीनों आवेदकों को भी राहत देने का आग्रह किया और कहा कि निकट भविष्य में मुकदमे का निष्कर्ष निकलने की संभावना नहीं है क्योंकि अभी तक आरोप भी तय नहीं किए गए हैं।
जब अदालत को सूचित किया गया कि निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई छह फरवरी को होनी है, तो अदालत ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 17 मार्च को करेगी।
पीठ ने कहा, "देखते हैं कि तब तक आरोप तय हो पाते हैं या नहीं।"
संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले की बरसी पर हुई एक बड़ी सुरक्षा चूक के मामले में आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने कथित तौर पर 13 दिसंबर, 2023 को शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में छलांग लगाई, कनस्तरों से पीली गैस छोड़ी और नारे लगाए, जिसके बाद कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया।
लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों - अमोल शिंदे और नीलम आजाद - ने कथित तौर पर संसद परिसर के बाहर "तनाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगाते हुए कनस्तरों से रंगीन गैस छोड़ी।
आरोपी नीलम आजाद और महेश कुमावत को जुलाई 2025 में उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दी गई थी।
भाषा
प्रशांत संतोष
संतोष
0202 1832 दिल्ली