'आम' चुनाव चिह्न संबंधी रामदास की याचिका पर अदालत का निर्वाचन आयोग को नोटिस
सुरेश
- 02 Feb 2026, 06:20 PM
- Updated: 06:20 PM
चेन्नई, दो फरवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक अध्यक्ष एस. रामदास की उस याचिका पर निर्वाचन आयोग को सोमवार को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी पार्टी को 'आम' चुनाव चिह्न आवंटित करने और इस संबंध में उन्हें आधिकारिक सूचना भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने पीएमके की याचिका की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी।
जब यह याचिका सुनवाई के लिए खंडपीठ के समक्ष आई, तो रामदास की ओर से पेश अधिवक्ता के. अरुल ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने अनजाने में पूर्व अध्यक्ष अंबुमणि के पते पर 'आम' चुनाव चिह्न आवंटित करने वाला एक पत्र भेज दिया, जो अब पार्टी के सदस्य भी नहीं हैं।
जब अंबुमणि की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन.एल. राजा ने अपनी दलील पेश करने का प्रयास किया, तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "हम आपकी बात नहीं सुनेंगे, क्योंकि आप मुकदमे में पक्षकार है ही नहीं।"
राजा ने कहा कि वह इस मामले में पक्षकार बनने के लिए आवेदन दाखिल करेंगे।
अपनी याचिका में रामदास ने आरोप लगाया कि अंबुमणि ने जाली दस्तावेज बनाकर निर्वाचन आयोग के साथ धोखाधड़ी की है। इन जाली दस्तावेजों को चार दिसंबर, 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
अध्यक्ष रामदास के नेतृत्व में पदाधिकारियों के नामों में परिवर्तन और उनके कार्यालय के पते में बदलाव की सूचना भी निर्वाचन आयोग को दे दी गई थी। उन्होंने आगे बताया कि आयोग से 'आम' चुनाव चिह्न आवंटित करने का भी अनुरोध किया गया था।
इस स्थिति के बावजूद, आयोग ने पिछले एक महीने में कोई जवाब नहीं दिया। जब यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आया, तो आयोग के वकील ने खुली अदालत में बहस करते हुए कहा, "चूंकि दो गुटों के पुत्र और पिता के बीच पार्टी अध्यक्ष पद को लेकर विवाद है, इसलिए निर्वाचन आयोग 2026 के चुनावों के लिए 'आम' चुनाव चिह्न को निलंबित रखेगा।"
इस प्रकार, आज तक, निर्वाचन आयोग ने वर्तमान अध्यक्ष रामदास को उनके कार्यालय के पते पर कोई नया पत्र नहीं भेजा है और न ही उसने चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाने का विकल्प चुना है।
इस बीच, विल्लुपुरम जिले के थाइलापुरम स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में रामदास ने अपने बेटे अंबुमणि के नेतृत्व वाले गुट का नाम लिये बिना कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले पर अपना फैसला सुनाए जाने से पहले ही वह दावा कर रहे हैं कि उन्हें 'आम' का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।
उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, "फैसले का इंतजार कीजिए, आम का चुनाव चिह्न हमें ही मिलेगा।"
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