बजट: नक्सलवाद से निपटने के लिए आवंटन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पारुल
- 01 Feb 2026, 07:19 PM
- Updated: 07:19 PM
नयी दिल्ली, एक फरवरी (भाषा) केंद्रीय बजट में नक्सलवाद का मुकाबला करने की रणनीति के तहत सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च के लिए 3,610.80 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
गृह मंत्रालय का लक्ष्य 31 मार्च तक देश से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को जड़ से खत्म करना है।
वर्ष 2026-27 में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) और विशेष अवसंरचना योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 3,006.56 करोड़ रुपये के मुकाबले 3,610.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट दस्तावेज के मुताबिक, ''इस मद में सुरक्षा संबंधी व्यय योजना, विशेष अवसंरचना योजना और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के 35 सबसे अधिक प्रभावित जिलों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा, एलडब्ल्यूई प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता, नागरिक कार्य कार्यक्रम और विभिन्न राज्यों में मीडिया योजना से जुड़ी गतिविधियां भी इसमें शामिल हैं।''
यह धनराशि पुलिस बलों के आधुनिकीकरण से जुड़ी केंद्र प्रायोजित योजना के तहत "राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों को अंतरण" मद के अंतर्गत गृह मंत्रालय को उपलब्ध कराई गई है।
कुल मिलाकर, पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन को लगभग 24 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में 4,061.34 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछले वर्ष का संशोधित अनुमान 3,279.53 करोड़ रुपये था।
बजट में आपदा प्रबंधन के अंतर्गत नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम और मीडिया योजना के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस कार्यक्रम में नक्सल प्रभावित इलाकों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की ओर से नागरिक जागरूकता गतिविधियों के साथ-साथ मीडिया संपर्क अभियान एवं प्रचार पर किया जाने वाला व्यय शामिल है।
पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मार्च 2026 तक देश वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से मुक्त हो जाएगा, इसके लिए ठोस और निर्णायक रणनीति अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने नक्सल हिंसा को लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा था कि अब तक इसमें करीब 17,000 लोगों की जान जा चुकी है।
शाह के अनुसार, 2014 से 2024 के दौरान नक्सल हिंसा की घटनाओं में 2004 से 2014 की तुलना में 53 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
गृह मंत्री ने कहा था कि सरकार वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए काम कर रही है और स्थायी शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकास कार्यों के साथ-साथ सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं।
भाषा अमित पारुल
पारुल
0102 1919 दिल्ली