कच्छ का छारी-ढांड पक्षी विहार गुजरात का पांचवां रामसर स्थल बना
पवनेश
- 31 Jan 2026, 05:53 PM
- Updated: 05:53 PM
कच्छ, 31 जनवरी (भाषा) गुजरात के मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शनिवार को कहा कि कच्छ जिले में स्थित छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि की सूची में शामिल किया गया है।
राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि नल सरोवर, थोल, खिजड़िया और वधवाना के बाद, छारी-ढांड गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला रामसर स्थल बन गया है।
उन्होंने कहा, ''छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर का दर्जा मिलने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय विकास और वैश्विक मान्यता जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह पर्यावरण पर्यटन के लिए भी एक पसंदीदा गंतव्य बनेगा।''
'रामसर कन्वेंशन' आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश के कुल आर्द्रभूमि क्षेत्र का 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजरात में है, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है। इसमें कहा गया है कि गुजरात की आर्द्रभूमि लगभग 35 लाख हेक्टेयर में फैली हुई है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 17.8 प्रतिशत है।
मोढवाडिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की दूरदृष्टि से गुजरात आर्द्रभूमि संरक्षण में एक महत्वपूर्ण राज्य बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में स्थानीय समुदायों और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित लोगों को बधाई दी।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ''यह जानकर मुझे बेहद खुशी हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी विहार और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल का दर्जा मिला है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''ये मान्यताएं जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां अनगिनत प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।''
मुख्यमंत्री पटेल ने अपने संदेश में कहा, ''गुजरात की जैव विविधता के लिए बहुत अच्छी खबर। छारी-ढांड पक्षी विहार को रामसर स्थल के रूप में शामिल करना आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।''
पटेल ने कहा कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति समग्र दृष्टिकोण की सफलता को दर्शाता है।
भाषा आशीष पवनेश
पवनेश
3101 1753 कच्छ