यासीन मलिक के लिए मृत्युदंड की मांग संबंधी एनआईए की याचिका पर 22 अप्रैल को होगी सुनवाई
राजकुमार
- 28 Jan 2026, 02:40 PM
- Updated: 02:40 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग संबंधी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अपील पर इस अलगाववादी नेता के जवाब के सिलसिले में एनआईए को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई की तारीख 22 अप्रैल तय की।
मलिक इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वह तिहाड़ जेल से डिजिटल तरीके से पेश हो रहा है।
जब उसने एनआईए पर 2023 में दायर अपील में 'तारीखें लेकर' 'समय बर्बाद करने' और उसे 'सदमा' पहुंचाने का आरोप लगाया तब न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं है।
पीठ ने कहा, "कोई जल्दबाजी नहीं है। यह सजा बढ़ाने के लिए है। आप पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।"
अदालत ने एनआईए को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का "अंतिम अवसर" दिया।
एनआईए के वकील ने बताया कि मलिक ने एजेंसी की अपील के जवाब में एक लंबा उत्तर दाखिल किया था, जिसमें ऐसी सामग्री भी थी जो इस मामले से 'संबंधित नहीं' है। उन्होंने कहा कि एजेंसी अपने जवाब को देख रही है।
एनआईए के वकील ने मलिक के इस दावे पर भी आपत्ति जताई कि अभिकरण ने बार-बार स्थगन की मांग की थी। वकील ने कहा कि मलिक ने खुद अपील का जवाब दाखिल करने में एक साल का समय लिया।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि एजेंसी इस मामले में बंद कमरे में सुनवाई की मांग कर रही है।
दिल्ली की एक अधीनस्थ अदालत ने प्रतिबंधित जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मलिक को 24 मई, 2022 को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (भादंसं) के तहत विभिन्न अपराधों का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
एनआईए ने 2023 में उच्च न्यायालय में अपील दायर कर मलिक की उम्रकैद को बदलकर उसे अधिकतम सजा मृत्युदंड देने की मांग की थी।
एनआईए की अपील के जवाब में मलिक ने कहा कि उसने लगभग तीन दशकों तक सरकार द्वारा मंजूर "गुप्त संपर्क" तंत्र में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में काम किया, तथा जम्मू और कश्मीर में शांति को बढ़ावा देने के लिए कई प्रधानमंत्रियों, खुफिया प्रमुखों और यहां तक कि बड़े व्यापारियों के साथ भी काम किया।
उन्होंने दावा किया कि सरकार सहभागिता के इतिहास को "मिटाने" का प्रयास कर रही है।
मलिक ने कहा, "राजनीति में बलि का बकरा बनना कोई नई बात नहीं है, यह एक तरह का नया सामान्य चलन बन गया है, लेकिन बलि का बकरा बनना ऐसी चीज हो गयी है जो नैतिकता के मनमानेपन की सीमा को भी पार कर जाता है, अगर राजनीति में नैतिकता जैसा कुछ है तो।"
भाषा तान्या राजकुमार
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