गुजरात के ढोलक वादक, लेखक, 'आख्यान' विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता को पद्मश्री के लिए चुना गया
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
अहमदाबाद, 25 जनवरी (भाषा) गुजरात की चार प्रतिष्ठित हस्तियों को सामाजिक सेवा, साहित्य और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।
इनमें जूनागढ़ निवासी और ढोलक वादक मीर हाजीभाई कासमभाई, हास्य शैली के लेखक और निबंधकार रतिलाल बोरिसागर, पारंपरिक गुजराती मानभट्ट कहानी कहने की 'आख्यान' शैली के प्रसिद्ध कलाकार धार्मिकलाल पंड्या (94) और सूरत स्थित सामाजिक कार्यकर्ता नीलेश मंडलेवाला शामिल हैं।
छह दशकों के अपने करियर में हजारों कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुके, प्रख्यात ढोलक वादक कासमभाई को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए चुना गया है।
"हाजी रामाकाडू" से लोकप्रिय कासमभाई ने गायों के लिए धन जुटाने और गौशालाओं के निर्माण को लेकर गुजरात भर में आयोजित 3,000 से अधिक कार्यक्रमों में अपनी विशिष्ट शैली में ढोलक भी बजाया है।
कासमभाई (80) ने अपने आवास पर पत्रकारों से कहा, "मुझे यह पुरस्कार पाकर बेहद खुशी हो रही है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मुझे बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेरे योगदान को पहचाना और मुझे पद्मश्री से सम्मानित करने का फैसला किया। आज मुझे लगभग छह दशकों की अपनी मेहनत का फल मिला है।"
उन्होंने कहा, "मैं कई वर्षों से ढोलक बजा रहा हूं। मैंने दीवालीबेन भील, उस्मान मीर और कीर्तिदान गढ़वी सहित कई प्रसिद्ध कलाकारों के लिए ढोलक बजाई है। मंचीय प्रस्तुतियों के अलावा, मैंने कई निजी एल्बम और गुजराती फिल्मों के लिए स्टूडियो रिकॉर्डिंग भी की है।"
बोरिसागर को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए चुना गया है। बोरिसागर ने अपने करियर की शुरुआत एक कहानीकार के रूप में की थी, लेकिन अंततः हास्य लेखक के रूप में ख्याति प्राप्त की।
उनके कई हास्य संग्रह और उपन्यास आए, जिनमें प्रशंसित पुस्तक 'एंजॉयग्राफी' भी शामिल है। उन्होंने बाल साहित्य से संबंधित कई रचनाओं का संपादन भी किया।
अमरेली जिले के निवासी बोरिसागर (87) को उनके निबंध संग्रह 'मोजमा रेवु रे' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बोरिसागर ने कहा, ''मेरी लेखन यात्रा 1960 में शुरू हुई। अब तक मैंने हास्य शैली में 14 पुस्तकें लिखी हैं। जब आपके काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है तो यह हमेशा बहुत खुशी की बात होती है।"
गुजराती मानभट्ट 'आख्यान' शैली की कहानी कहने की कला के प्रसिद्ध कलाकार वडोदरा के पंड्या इस प्राचीन, लयबद्ध प्रदर्शन परंपरा के उस्ताद के रूप में पहचाने जाते हैं।
पंड्या ने अपने पिता चुनीलाल व्यास के मार्गदर्शन में कम उम्र से ही आख्यान कला में महारत हासिल की और इस कला रूप के पुनरुद्धार और लोकप्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, "यह सम्मान मेरा नहीं; यह महान कवि प्रेमानंद, नरसिंह मेहता और हेमचंद्राचार्य का है। मैंने तो बस प्रयास किया और सफल हुआ।"
सूरत निवासी नीलेश मंडलेवाला ने लोगों की जान बचाने के लिए 1,300 से अधिक अंगदान की सुविधा प्रदान की है। मंडलेवाला सामाजिक कार्यकर्ता और 'डोनेट लाइफ' के संस्थापक हैं।
मंडलेवाला ने कहा, "यह सम्मान उन सभी अंगदाताओं और उनके परिजनों का है जिन्होंने दूसरों की जान बचाने का बीड़ा उठाया। यह सम्मान उन पुलिसकर्मियों, अग्निशमन एवं आपातकालीन कर्मचारियों, डॉक्टरों और हवाई अड्डे के कर्मचारियों के साथ-साथ हमारे स्वयंसेवकों का भी है जिन्होंने अंगों को पहुंचाने में हमारी मदद की।"
भाषा आशीष प्रशांत
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