सनातन धर्म विवाद: मद्रास उच्च न्यायालय ने भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की
माधव
- 21 Jan 2026, 08:44 PM
- Updated: 08:44 PM
मदुरै, 21 जनवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज उस प्राथमिकी को रद्द कर दिया है जिसमें उनपर 'सनातन धर्म' को लेकर उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया गया है।
अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि 'नफरत फैलाने वाले भाषण' देने की शुरुआत करने वालों को बिना किसी सजा के छोड़ दिया जाता है जबकि उस पर प्रतिक्रिया देने वालों को कानून का सामना करना पड़ता है।
प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करने वाली भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख मालवीय की याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति एस. श्रीमती ने कहा कि मामले को जारी रखना विधि का दुरुपयोग होगा, इसलिए तिरुचिरापल्ली नगर पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द की जाती है।
न्यायाधीश ने कहा कि उदयनिधि की टिप्पणियां नफरत फैलाने वाले भाषण के समान थीं और इस पर सवाल उठाना एक प्रतिक्रिया थी।
यह मामला वर्ष 2023 में स्टालिन द्वारा दिए गए उन बयानों पर केंद्रित है, जिनमें उन्होंने सनातन धर्म के 'उन्मूलन' का आह्वान किया था और इसकी तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की थी। इस पर मालवीय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह सनातन धर्म का पालन करने वाली 80 प्रतिशत आबादी के 'नरसंहार' का आह्वान करने जैसा है।
अदालत का मानना था कि मालवीय की टिप्पणियों ने द्रमुक मंत्री के उन बयानों को 'विकृत' नहीं किया, जो नफरत फैलाने वाले भाषण के समान थे।
प्रतिवादी ने अपने बयान में कहा था कि महात्मा गांधी और दिवंगत मुख्यमंत्री के. कामराज सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने सनातन धर्म के विरुद्ध राय व्यक्त की थी, लेकिन इस पर अदालत ने कहा कि वे केवल कुछ अवांछित प्रथाओं को समाप्त करवाना चाहते थे। ई.वी. रामासामी उर्फ पेरियार को छोड़कर, इनमें से किसी भी नेता ने सनातन धर्म के विरुद्ध बात नहीं की थी।
यह प्राथमिकी तिरुचिरापल्ली स्थित द्रमुक पदाधिकारी के.ए.वी. थिनकरन की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा गया है, ''यह न्यायालय दुख के साथ इस व्यापक स्थिति को दर्ज करता है कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने की शुरुआत करने वाले व्यक्ति को बिना किसी सजा के छोड़ दिया जाता है, लेकिन नफरत फैलाने वाले भाषण पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति को कानून का सामना करना पड़ता है। न्यायालय प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्तियों से भी पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन नफरत फैलाने वाले भाषण देने की शुरुआत करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून को लागू नहीं कर रहे हैं।''
फैसले में कहा गया है कि वर्तमान मामले में नफरत फैलाने वाले भाषण के लिए मंत्री के खिलाफ राज्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन अन्य राज्यों में कुछ मामले दर्ज किए गए हैं।
यह भी कहा कि द्रविड़ कषगम और उसके बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक), जिससे मंत्री संबंधित हैं, द्वारा पिछले 100 वर्षों से हिंदू धर्म पर स्पष्ट आक्रमण किया जा रहा है। समग्र परिस्थितियों पर विचार करते हुए, यह देखा गया है कि याचिकाकर्ता ने मंत्री के भाषण के छिपे हुए अर्थ पर सवाल उठाया था।
अदालत ने फैसले में कहा, ''समग्र रूप से विचार करने पर मंत्री का भाषण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह पूरी तरह से 80 प्रतिशत हिंदुओं के खिलाफ है, जो नफरत फैलाने वाले भाषण की श्रेणी में आता है।''
भाषा संतोष माधव
माधव
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