जर्मन चांसलर की बेंगलुरु यात्रा निजी और पूर्वनिर्धारित थी, भाजपा इसे ‘राजनीतिक रंग’ दे रही है: पाटिल
राखी देवेंद्र
- 14 Jan 2026, 10:16 PM
- Updated: 10:16 PM
बेंगलुरु, 14 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मंत्री एम. बी. पाटिल ने बुधवार को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के यहां दौरे के दौरान उनकी अगवानी नहीं की क्योंकि यह एक निजी और पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम था।
पाटिल ने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अंतरराष्ट्रीय अतिथि की यात्रा को “राजनीतिक रंग” देने का आरोप लगाते हुए इसे “गैर-जिम्मेदाराना” करार दिया।
मर्ज मंगलवार को भारत की दो दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन बेंगलुरु पहुंचे थे। केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी पाटिल और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने की।
भाजपा ने सिद्धरमैया और शिवकुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे जर्मन चांसलर का स्वागत करने के बजाय मैसूरु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने गये, जो तमिलनाडु जाते समय वहां रुके थे।
पाटिल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “जर्मनी के संघीय चांसलर की यह यात्रा पूरी तरह निजी और पहले से तय कार्यक्रम के तहत थी, जिसमें बोश और आईआईएससी का दौरा शामिल था। राज्य सरकार के साथ कोई आधिकारिक बैठक निर्धारित नहीं थी।”
उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री या मंत्रियों द्वारा औपचारिक स्वागत का प्रश्न ही नहीं उठता। यदि कोई सरकारी स्तर की बैठक होती, तो स्वयं मुख्यमंत्री उसका नेतृत्व करते।”
इससे पहले, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर “गलत प्राथमिकताएं” तय करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक के प्रमुख का स्वागत करने की उपेक्षा की गई, जबकि “राजनीतिक निष्ठा और आलाकमान को खुश करने” को प्राथमिकता दी गई।
इस बीच, राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार को जर्मन चांसलर के किसी भी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था और ऐसा प्रतीत होता है कि वे बिना किसी आधिकारिक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने आये और चले गए।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां नहीं होनी चाहिए और राज्य सरकार भी विदेशी अतिथियों के प्रति सम्मान प्रकट करना चाहती है।
परमेश्वर ने कहा कि यदि किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का राज्य दौरा होता है, तो राज्य सरकार को भी अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को आधिकारिक रूप से इस दौरे की जानकारी दी थी, परमेश्वर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और यह जानने की आवश्यकता है कि इस संबंध में क्या निर्देश जारी किए गए थे।
भाषा
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