‘फर्जी’ डिग्री मामले में निजी विश्वविद्यालय के प्रवर्तकों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया
जोहेब अविनाश
- 03 Jan 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
नयी दिल्ली/शिमला, तीन जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने राज्य में छात्रों को फर्जी डिग्रियां बेचने से जुड़े मामले में सोलन स्थित एक निजी विश्वविद्यालय के प्रवर्तकों मनदीप राणा और उसकी मां अशोनी कंवर को शनिवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया।
आदेश में कहा गया है कि विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए), 2018 के तहत राणा और कंवर के खिलाफ यह आदेश जारी किया।
मनदीप सोलन स्थित मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू) के मुख्य प्रवर्तक राजकुमार राणा का पुत्र है।
अदालत ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग लेकिन समान आदेश जारी किए, जिनमें कहा गया कि यह "स्थापित" हो चुका है कि उन्होंने "जानबूझकर भारतीय कानून की प्रक्रिया से बचने की कोशिश की।"
आदेश में कहा गया है कि अदालत का मानना है कि इन आरोपियों ने अभियोग से बचने के लिए भारत छोड़ दिया।
अदालत ने कहा कि इस मामले में एक सौ करोड़ रुपये या उससे अधिक धनराशि का लेनदेन हुआ है।
ईडी के अनुसार, दोनों आरोपी फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में हैं।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 2020 में राजकुमार राणा और अन्य के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था।
साल 2024 में जारी एक बयान में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि राजकुमार राणा और उनके साथियों ने "फर्जी" डिग्रियां बेचकर अपराध के जरिये 387 करोड़ रुपये अर्जित किए।
ईडी ने दिसंबर 2022 में राजकुमार राणा और 15 अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद, शिमला की पीएमएलए अदालत ने जनवरी 2023 में अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कंवर तथा मनदीप राणा को समन जारी किया।
लेकिन दोनों ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया, जिसके बाद अदालत ने नवंबर 2023 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए।
अधिकारियों के अनुसार एजेंसी अब दोनों के भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने के बाद उनकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
एफईओए का उद्देश्य उन व्यक्तियों को न्याय के कटघरे में लाना है, जिन्होंने धोखाधड़ी करने के बाद भारत छोड़ दिया और जिन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की हो।
इससे पहले शराब कारोबारी विजय माल्या और हथियार बिचौलिया संजय भंडारी को भी भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।
भाषा जोहेब