यातायात धोखाधड़ी: दिल्ली में फर्जी ‘नो-एंट्री’ स्टिकर गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
यासिर पारुल
- 13 Dec 2025, 06:12 PM
- Updated: 06:12 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) दिल्ली पुलिस ने यातायात धोखाधड़ी और जबरन वसूली में शामिल एक आपराधिक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कथित साजिशकर्ता समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि यह गिरोह व्यावसायिक वाहनों को ‘नो एंट्री’ से जुड़े प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के लिए कथित तौर पर फर्जी ‘स्टिकर’ बेचता था।
पुलिस के मुताबिक, उसने रिंकू राणा उर्फ भूषण, सोनू शर्मा और मुकेश कुमार उर्फ पकौड़ी की गिरफ्तारी के साथ ही यातायात से संबंधित धोखाधड़ी करने वाले तीसरे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ये आरोपी जबरन वसूली में शामिल एक अन्य गिरोह से भी जुड़े हुए थे।
पुलिस के अनुसार, रिंकू राणा एक संगठित गिरोह संचालित कर रहा था, जो दो हजार से पांच हजार रुपये प्रति माह की दर से नकली ‘मार्का’ या ‘स्टिकर’ बेचकर व्यावसायिक माल वाहनों को प्रतिबंधित घंटों के दौरान आवाजाही की सुविधा प्रदान करता था। ‘स्टिकर’ को यातायात नियमों से संबंधित चालान से बचने के लिए गलत तरीके से पेश किया गया था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 31 लाख रुपये नकदी, कई करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, 500 से अधिक नकली ‘स्टिकर’ और गिरोह को संचालित करने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले छह मोबाइल फोन बरामद किए।
यह कार्रवाई यातायात पुलिस के एक अधिकारी की ओर से इस साल अप्रैल में दर्ज करवाई गई शिकायत के आधार पर की गई।
अधिकारी ने एक व्यावसायिक वाहन को रोका था, जिसने फर्जी ‘स्टिकर’ के जरिये प्रवर्तन कार्रवाई से छूट का दावा किया था।
पुलिस के मुताबिक, जांच से पता चला कि अवैध आवाजाही में वाहनों की मदद करने और चालकों को यातायात पुलिस जांच चौकियों के बारे में सूचना देने के लिए सोशल मीडिया ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘यातायात प्रवर्तन को कमजोर करते हुए चालकों और वाहन मालिकों को धोखा देने के लिए एक समानांतर प्रणाली चलाई जा रही थी। सबूतों के आधार पर बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के अंतर्गत संगठित अपराध से संबंधित प्रावधान लागू किए गए हैं।’’
पुलिस ने बताया कि सोनू शर्मा सोशल मीडिया ग्रुप का प्रबंधन करता था, जिसके माध्यम से ‘स्टिकर’ बेचे जाते थे और यातायात पुलिस की आवाजाही के बारे में वास्तविक समय पर अलर्ट प्रसारित किए जाते थे।
संबंधित घटनाक्रम में मुकेश कुमार उर्फ पकौड़ी को भी पकड़ लिया गया।
मुकेश, राजकुमार उर्फ राजू मीणा का सहयोगी है और मीणा को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत पहले गिरफ्तार किया गया था।
भाषा
यासिर