सरकार को ट्रंप के दावे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए: रास में विपक्ष की मांग
अविनाश
- 03 Feb 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल रही तथा उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेल खरीद संबंधी दावे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
विपक्षी सांसदों की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी "रूसी तेल खरीदना बंद करने तथा अमेरिका एवं संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं।"
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य रजनी अशोकराव पाटिल ने कहा, "कहा जा रहा है कि भारत अपना कृषि क्षेत्र अमेरिका के लिए खोल देगा। अगर आप (सरकार) किसानों की रक्षा नहीं करते, अगर आप उनके लिए कृषि बाजार खोल देते हैं... ट्रंप ने कहा है कि 500 अरब अमेरिकी डॉलर की खरीद होने वाली है... संसद और देश के लिए यह जानना आवश्यक है कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप के साथ किन पहलुओं पर चर्चा की।"
उन्होंने इस दावे का भी जिक्र किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और इसके बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत ने अपने दीर्घकालिक सहयोगी (स्पष्ट रूप से रूस की ओर इशारा करते हुए) का साथ छोड़ देगा। उन्होंने सरकार से संसद में इन सभी मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस के रीताब्रता बनर्जी ने आरोप लगाया कि "केंद्र सरकार अमेरिका के आर्थिक विस्तारवाद के आगे झुक गई है और रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने के संबंध में ट्रंप द्वारा निर्धारित सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया है।"
कांग्रेस सदस्य पाटिल ने दावा किया कि बजट सत्र की शुरुआत में संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण "नागरिकों की जमीनी हकीकत को प्रतिबिंबित नहीं करता है"। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ होने के बावजूद लघु एवं मध्यम उद्यमी संघर्ष कर रहे हैं।
तृणमूल सदस्य बनर्जी ने आरोप लगाया, "भारत दुनिया के लिए एक रहस्य बना हुआ है, जटिलता के कारण नहीं बल्कि इसलिए कि सरकार के दावे अब जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। जीडीपी वृद्धि के मुख्य आंकड़ों का इस्तेमाल बेरोजगारी, शिक्षा के खराब परिणामों और बढ़ती असमानता से ध्यान हटाने के लिए एक ढाल के रूप में किया जा रहा है... मीडिया की स्वतंत्रता सीमित हो रही है, जिससे नागरिकों के पास सत्ता की विश्वसनीय निगरानी नहीं रह गई है।"
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ पर एक पोस्ट में घोषणा की कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं जिसके तहत वाशिंगटन दिल्ली पर कम पारस्परिक शुल्क लगाएगा, जो 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बातचीत के बाद यह पोस्ट की थी।
पिछले साल ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसमें रूसी ईंधन की खरीद पर 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल था।
भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत विदेशों से खरीद कर पूरा करता है।
भाषा
माधव अविनाश
अविनाश
0302 1841 संसद