करूर भगदड़ : न्यायालय का जांच आयोग को निलंबित करने के आदेश में संशोधन से इनकार
धीरज रंजन
- 12 Dec 2025, 05:31 PM
- Updated: 05:31 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की जांच के लिए गठित एक सदस्यीय आयोग और एसआईटी को निलंबित करने संबंधी अपने आदेश में शुक्रवार को संशोधन करने से इनकार कर दिया जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी।
शीर्ष अदालत ने इसी के साथ तमिलनाडु सरकार की ओर से इस संबंध में दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सब कुछ निष्पक्ष और तटस्थ हो।’’
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दायर रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘उच्च न्यायालय में कुछ गड़बड़ चल रही है। उच्च न्यायालय में जो हो रहा है वह सही नहीं है।’’
शीर्ष अदालत ने 13 अक्टूबर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से करूर भगदड़ की जांच कराने का आदेश दिया। भगदड़ की घटना 27 सितंबर को अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की रैली के दौरान हुई थी। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि इस घटना ने राष्ट्रीय चेतना को झकझोर दिया है और निष्पक्ष और तटस्थ जांच की हकदार है।
टीवीके द्वारा स्वतंत्र जांच का अनुरोध करते हुए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सीबीआई जांच का आदेश दिया और इसकी निगरानी के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पर्यवेक्षी समिति का गठन किया। इसी के साथ विशेष जांच टीम (एसआईटी) और एक सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति के निर्देशों को निलंबित कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन सेंथिलकुमार की भी आलोचना की थी, जिन्होंने घटना से संबंधित याचिकाओं पर विचार किया, एसआईटी जांच का आदेश दिया और टीवीके और उसके सदस्यों को मामले में पक्षकार बनाए बिना उनके खिलाफ टिप्पणियां कीं।
न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने कहा कि राज्य की ओर से गठित आयोग सीबीआई जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगा और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें देने तक ही सीमित रहेगा।
पीठ ने विल्सन को आयोग की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना का अवलोकर करने का निर्देश देते हुए कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सब कुछ निष्पक्ष और तटस्थ हो।’’
पीठ ने याचिका पर कोई नोटिस जारी नहीं किया और न ही 13 अक्टूबर के अपने अंतरिम आदेश को रद्द किया। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा कि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट दाखिल की है और टिप्पणी की है, ‘‘उच्च न्यायालय में कुछ गड़बड़ चल रही है। उच्च न्यायालय में जो हो रहा है वह सही नहीं है। हमने रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट देखी है। हम इस पर कार्रवाई करेंगे।’’
पीठ ने कहा कि उसने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा भेजी गई उस रिपोर्ट का अवलोकन किया है जिसमें बताया गया है कि जनसभाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अनुरोध करने वाली एक रिट याचिका को आपराधिक रिट याचिका के रूप में कैसे पंजीकृत किया गया था।
विल्सन और राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट की एक प्रति मुहैया कराने का अनुरोध करते हुए कहा कि वे इस संबंध में जवाब दाखिल करना चाहेंगे।
उच्चतम न्यायालय ने करूर भगदड़ मामले में केके रमेश द्वारा दायर एक नई याचिका पर नोटिस जारी किया और पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा तथा मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
शीर्ष अदालत ने 30 अक्टूबर को करूर भगदड़ के एक पीड़ित के परिवार को सीबीआई से संपर्क करने और अधिकारियों द्वारा उन्हें धमकाने के अपने आरोप को सामने रखने के लिए कहा था।
भाषा धीरज