कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता को लेकर खींचतान का मुद्दा नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में उठाया
संतोष प्रशांत
- 10 Dec 2025, 11:08 PM
- Updated: 11:08 PM
बेलगावी (कर्नाटक), 10 दिसंबर (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने बुधवार को कर्नाटक विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस में चल रहे सत्ता संघर्ष का मुद्दा उठाया और दावा किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता और सार्वजनिक चर्चा राज्य के विकास को प्रभावित कर रही है।
उत्तरी कर्नाटक पर चर्चा के दौरान, भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहे संघर्ष का जिक्र किया।
अशोक ने कांग्रेस एमएलसी चन्नाराज हट्टीहोली की पोस्ट का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पद तो अब भी उनके पास है, लेकिन हाल ही में एक कांग्रेस एमएलसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करके उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री बताया है।’’
कांग्रेस नेताओं द्वारा बार-बार नेतृत्व के मुद्दे पर बयान देने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने शहरी विकास मंत्री बी.एस. सुरेश (बायराथी सुरेश) द्वारा मीडिया को दिए गए ‘राजा अभी जीवित है’ वाले बयान का भी जिक्र किया।
जब विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर ने उनसे मुख्य विषय से न भटकने को कहा, तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘क्यों? मैं नेतृत्व की बात कर रहा हूं। हम उनके (सिद्धरमैया के) नेतृत्व पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। अगर नेतृत्व का मुद्दा है, तो उत्तरी कर्नाटक का विकास नहीं होगा।’’
इस मौके पर हस्तक्षेप करते हुए सुरेश ने कहा कि नेतृत्व के मुद्दे पर सिद्धरमैया और कांग्रेस आलाकमान फैसला करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मीडिया से सिर्फ इतना कहा था कि सिद्धरमैया अब भी ‘मजबूत’ हैं और मुख्यमंत्री व डी.के. शिवकुमार दोनों भाईचारे से काम कर रहे हैं।
इस पर भाजपा सदस्यों ने जोरदार ठहाके लगाकर प्रतिक्रिया दी, जिससे विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। अशोक ने कहा, ‘‘हर दिन मीडिया में खबरें आती हैं। इसका अंत कहीं न कहीं तो होना ही चाहिए।’’
मंत्री प्रियंक खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने सिर्फ दो कार्यकाल में पांच मुख्यमंत्री देखे हैं। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या इससे विकास पर कोई असर नहीं पड़ा?’’
एच.सी. बालकृष्ण, बेलूर गोपालकृष्ण और अन्य कई कांग्रेस विधायकों ने भी इस बहस में हिस्सा लिया और भाजपा में चल रही अंदरूनी कलह को उजागर किया।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, खासकर कांग्रेस की ओर से खरगे और भाजपा की ओर से सी.एन. अश्वथ नारायण के बीच। अश्वथ ने पूछा, ‘‘क्या कांग्रेस सरकार अब भी जीवित है?’’
अशोक ने कांग्रेस विधायक एच.डी. रंगनाथ के उस बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अपने ‘राजनीतिक गुरु’ शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह भ्रम बना रहा, तो अधिकारी मौज-मस्ती करेंगे और काम नहीं करेंगे। अगर यह कांग्रेस अध्यक्ष का पद होता, तो हम यह सवाल नहीं पूछते। यह मुख्यमंत्री पद का मामला है।’’
हाल ही में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच नाश्ते पर हुई कूटनीति पर कटाक्ष करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘इडली और वड़ा साथ खाने से समस्या हल नहीं होगी; आपस में खुलकर बात करें और समस्या का समाधान निकालें। हर दिन हर किसी के मुख्यमंत्री पद के बारे में बात करने से इस पद की गरिमा नहीं बढ़ेगी।’’
भाषा संतोष