संदेशखाली हिंसा मामले का मुख्य गवाह सड़क हादसे में घायल, बेटे और चालक की मौत
पारुल प्रशांत
- 10 Dec 2025, 10:48 PM
- Updated: 10:48 PM
बारासात, 10 दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमले और उससे जुड़े सीबीआई मामलों के प्रमुख गवाहों में शामिल भोलानाथ घोष उत्तर 24 परगना जिले में बुधवार सुबह हुए एक सड़क हादसे में घायल हो गए। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि बशीरहाट के नाजत थाना क्षेत्र में बोयरमारी पेट्रोल पंप के पास बसंती राजमार्ग पर हुए इस हादसे में घोष के छोटे बेटे सत्यजीत (32) और उनकी कार के चालक साहनूर मोल्ला (27) की मौत हो गई।
अधिकारी के मुताबिक, 16 पहियों वाले ट्रक ने घोष की कार को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने बताया कि ट्रक घोष की कार को कुछ दूर तक घसीटकर ले गया, जिसके बाद वह राजमार्ग के किनारे स्थित जलाशय में जा गिरी।
अधिकारी के अनुसार, ट्रक को राजमार्ग के किनारे जलाशय के ऊपर खतरनाक तरीके से लटका हुआ पाया गया, जबकि दोषी चालक मौके से फरार हो गया।
बशीरहाट के पुलिस अधीक्षक (एसपी) हुसैन मेहदी रहमान ने बताया कि हादसे में घायल घोष को पहले एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि इलाज के बाद घोष को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल भेज दिए गए।
घोष ने संवाददाताओं से कहा, “मैं चालक के बगल वाली सीट पर बैठा था, जबकि मेरा बेटा उसके (चालक के) पीछे वाली सीट पर था। एक तेज रफ्तार ट्रक आया और हमारी कार के दाहिने हिस्से में जोरदार टक्कर मारी। यह कोई हादसा नहीं था, मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। घर लौटने और पुलिस से बात करने के बाद मुझे और जानकारी मिलेगी।”
घोष के मुताबिक, वह बशीरहाट उप मंडल न्यायालय जाने के लिए बेटे सत्यजीत के साथ संदेशखाली स्थित अपने आवास से निकले थे, जहां उन्हें तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता शेख शाहजहां की ओर से अपने खिलाफ दायर विभिन्न मामलों में से एक के सिलसिले में पेश होना था।
पुलिस ने बताया कि यह हादसा सुबह लगभग 8:45 बजे सड़क के उस हिस्से पर हुआ, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं है।
घोष ने कहा, “हम बलात्कार के झूठे मामले के सिलसिले में अदालत में पेश होने जा रहे थे, जो शाहजहां ने हमारे खिलाफ दर्ज कराया था। मुझे लगता है कि घर से निकलने के समय से ही हमारा पीछा किया जा रहा था।”
शाहजहां संदेशखाली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हुए हमले और उससे जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामलों के आरोपियों में शामिल हैं।
चश्मदीदों ने बताया कि विपरीत दिशा से तेज गति से आ रहे ट्रक ने घोष की कार में जबरदस्त टक्कर मार दी और उसे घसीटते हुए कुछ दूर तक ले गया, जिसके बाद वह (कार) राजमार्ग के किनारे स्थित जलाशय में जा गिरी।
घोष के बड़े बेटे बिस्वजीत ने दावा किया कि यह उनके पिता की हत्या का सुनियोजित प्रयास था। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शाहजहां ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए जेल में बैठे-बैठे यह “हमला” करवाया।
बिस्वजीत ने कहा, “जब से मेरे पिता ने सीबीआई के साथ सहयोग करना शुरू किया है, तब से शाहजहां और उनके समर्थक हमारे परिवार को लगातार धमकियां दे रहे हैं और हमें परेशान कर रहे हैं। शाहजहां के दो करीबी सहयोगी तृणमूल नजात पंचायत समिति की प्रमुख सबिता रॉय और उनके डिप्टी मुस्लिम शेख ने अपने आका के निर्देश पर इस हमले की साजिश रची।”
हालांकि, रॉय और शेख ने बिस्वजीत के आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए इन्हें खारिज कर दिया।
रॉय ने कहा, “यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं परिवार को लंबे समय से जानती हूं और इस घटना के बारे में पता चलने के बाद से लगातार उनके संपर्क में हूं। मैं इस हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग करती हूं और चाहती हूं कि सच्चाई सामने आए।”
वहीं, मुस्लिम ने कहा, “आरोप हास्यास्पद हैं। मैं इस परिवार को अच्छी तरह से जानता हूं और हम एक ही पार्टी के लिए काम करते हैं। ऐसा लगता है कि मेरे खिलाफ एक राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें मुझ पर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए उकसाया जा रहा है। मेरी उम्र 66 साल है और मैंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया।”
इस बीच, घोष के परिवार ने नाजत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
वहीं, राज्य पुलिस के फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने दुर्घटना में शामिल दोनों वाहनों की जांच की और घटनास्थल से नमूने एकत्र किए।
पुलिस ने कहा कि वह इस आशंका की जांच कर रही है कि ट्रक संदेशखाली हिंसा का फरार संदिग्ध अब्दुल हलीम मोल्लाह चला रहा था, जिसके खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों पर हमले से जुड़े मामले में 55 दिन से फरार शाहजहां को 29 फरवरी 2024 को गिरफ्तार कर लिया था।
शाहजहां के समर्थकों ने पांच जनवरी 2024 को ईडी अधिकारियों पर उस समय हमला कर दिया था, जब वे करोड़ों रुपये के राशन घोटाले के सिलसिले में उनसे (शाहजहां से) पूछताछ करने के लिए संदेशखाली स्थित उनके आवास पहुंचे थे।
संदेशखाली में शाहजहां और उनके समर्थकों के खिलाफ बड़े पैमाने पर भूमि हड़पने और स्थानीय महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने के भी आरोप लगे हैं।
विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस हादसे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “खबरों से पता चलता है कि ट्रक शाहजहां के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक अब्दुल हलीम मोल्लाह चला रहा था। उसके साथ नजरुल मोल्लाह भी था। अब्दुल का नाम सीबीआई के रिकॉर्ड में लंबे समय से भगोड़े के रूप में दर्ज है। इसलिए यह स्पष्ट है कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या की एक सोची-समझी साजिश है।”
भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि शाहजहां जेल में बैठकर एक-एक करके गवाहों को खत्म करवा रहा है।
उन्होंने कहा, “क्या इस बात में संदेह की कोई गुंजाइश है कि शाहजहां को ममता बनर्जी का संरक्षण हासिल है?”
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस दुर्घटना ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को शाहजहां से जुड़े मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं।
उन्होंने कहा, “जब तक शाहजहां शेख जैसे लोग पश्चिम बंगाल की जेल में हैं, भोलानाथ घोष जैसे लोग कभी सुरक्षित नहीं रहेंगे। आज उनके बेटे की हत्या कर दी गई। कल वे उन्हें नहीं बख्शेंगे। ये कुख्यात अपराधी हैं, जिन्हें तृणमूल का संरक्षण हासिल है।”
शुभेंदु ने कहा, “मुझे जेल के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार जानकारी मिल रही है कि ऐसे लोगों को नियमित रूप से मोबाइल फोन के इस्तेमाल की सुविधा मिलती है और वे जेल से ही अपना कारोबार चलाते हैं, और ये अधिकारी इसे रोकने में असमर्थ हैं। सीबीआई को इस मामले को बंगाल से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि सीबीआई पहले ही “चुनाव के बाद हुई हिंसा के 18 मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर चुकी है।”
भाषा पारुल