‘वंदे मातरम्’ को लेकर राज्यसभा में सत्ता पक्ष व विपक्ष ने एक-दूसरे पर साधा निशाना
अविनाश मनीषा
- 10 Dec 2025, 05:48 PM
- Updated: 05:48 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेताओं को घेरने की कोशिश की जबकि कांग्रेस ने राष्ट्र गीत को देश के कोने-कोने तक फैलाया। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह 1937 में जिन्नावादी सोच के सामने झुक गई और पूरे गीत को राष्ट्र गीत के रूप में नहीं स्वीकार कर उसके एक हिस्से को ही अपनाया।
कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 साल पूरे होने पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस चर्चा के दौरान कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं को घेरने की कोशिश की गयी जो नाकाम रही।
हुसैन ने कहा कि यह ऐतिहासिक सच है कि कांग्रेस पार्टी ने और उसके कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यक्रमों के जरिए ‘वंदे मातरम्’ को देश के कोने-कोने तक फैलाया। उन्होंने कहा कि 1937 के आसपास ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश में दो प्रमुख राजनीतिक विचारधाराएं थीं। उनमें से एक मुस्लिम लीग की विचारधारा और दूसरी हिंदू महासभा की थी।
उन्होंने कहा कि जब राष्ट्र गीत को लेकर बहुत सारे विवाद पैदा हो रहे थे तब कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर ‘वंदे मातरम्’ के दो अंतरे को शामिल करने का निर्णय किया।
हुसैन ने कहा कि भाजपा कांग्रेस पार्टी पर जो आरोप लगा रही है, वह वास्तव में कांग्रेस पर नहीं, बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, बी आर आंबेडकर पर आरोप लगा रही है।
भाजपा के दिनेश शर्मा ने चर्चा में कांग्रेस सदस्यों द्वारा किए गए दावों का प्रतिवाद करते हुए कहा कि उन्होंने तमाम तथ्य सामने रखे लेकिन इस बात का जिक्र नहीं किया कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद भी उस समय थे जिन्होंने इसका समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद ने प्रशंसा की थी और कहा था कि इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रश्न हिंदू और मुसलमान का नहीं था लेकिन उसे हिंदू और मुसलमान का मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने जिन्ना की सोच के अधीन अपने मतों का परिवर्तन किया।
भाजपा सदस्य ने कहा कि 1937 में नेहरू जी ने अपने परम मित्र और प्रसिद्ध उर्दू लेखक अली सरदार जाफरी, जिनसे वह परामर्श लिया करते थे, को एक पत्र लिखा।
शर्मा ने कहा कि पत्र में नेहरू जी ने राष्ट्र गीत को देवी मां के प्रति श्रद्धांजलि बताया, इसे बेतुका भी बताया और इसकी भाषा की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें बहुत सारे कठिन शब्द हैं जिन्हें लोग समझ नहीं पाएंगे तथा यह राष्ट्रवाद और प्रगति की आधुनिक अवधारणा के अनुरूप नहीं है।
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना-उबाठा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया कि राष्ट्र गीत के बारे में भाजपा ने तथ्यों को तोड़-मरोड़ पेश किया था लेकिन विपक्ष ने ‘वंदे मातरम्’ के बारे में सही तस्वीर रखी। उन्होंने कहा कि नेह्ररू जी की छवि खराब करने की कोशिश बंद होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने चर्चा में भाग लेते हुए एक कविता पढ़ी और कहा कि ‘वंदे मातरम्’ हमारी प्रेरणा, धारणा और शक्ति है।
निर्दलीय सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक वजहों से राष्ट्र गीत को छोटा कर दिया गया। वहीं बीजद सदस्य सुलता देव ने कहा कि राष्ट्र गीत को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा के पाइका आंदोलन को पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया।
चर्चा में भाजपा के नरेश बंसल, बाबू भाई देसाई, धर्मशीला गुप्ता, बाबू राम निषाद, आप के विक्रमजीत सिंह साहनी, बसपा के रामजी, टीएमसी-एम के जीके वासन, बीजद के शुभाशीष खुंटिया, तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा और साना सतीश बाबू ने भी भाग लिया।
भाषा अविनाश