ईवीएम के लिए आवंटित राशि के उपयोग पर नजर रखने को तंत्र बनाया जाए: संसदीय समिति
नरेश पवनेश
- 10 Dec 2025, 04:43 PM
- Updated: 04:43 PM
नई दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के लिए आवंटित धनराशि का जनवरी, 2025 तक केवल 10 प्रतिशत ही खर्च किए जाने संबंधी सरकार के जवाब को अस्वीकार करते हुए पैसे के उपयोग पर नजर रखने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाने की सिफारिश की है।
समिति ने यह भी कहा कि ईवीएम और वीवीपैट की खरीद के लिए आवंटित कोष का समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जाने की जरूरत है।
संसद के दोनों सदनों में चार दिसंबर को कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के 149वें प्रतिवेदन पर पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
समिति के पिछले प्रतिवेदन में यह बात सामने आई थी कि विधायी विभाग ने संशोधित प्राक्कलन 2024-25 में ईवीएम के लिए आवंटित 8.17 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी, 2025 तक केवल 10 प्रतिशत ही खर्च किया है। इसलिए समिति ने विभाग को ईवीएम पर अपने खर्च के तरीके में सुधार करने का सुझाव देते हुए उम्मीद जतायी थी कि विभाग इस पर अमल करेगा।
वहीं, संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र में चार दिसंबर को पेश रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने समयबद्ध तरीके से निधि का इस्तेमाल नहीं होने के कारणों के संबंध में बताया कि निर्माताओं से डिजाइन संशोधन और सुधार के संबंध में चालान प्राप्त नहीं होने के कारण राशि के इस्तेमाल में देरी हुई।
समिति ने मंत्रालय द्वारा दिए गए कारणों को अस्वीकार कर दिया और साथ ही अपनी सिफारिशों को दोहराते हुए कहा कि विभाग को ईवीएम और वीवीपैट की प्राप्ति के लिए दी गई धनराशि का समय पर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
समिति ने इस वजह का संज्ञान लिया कि विनिर्माताओं से 'इनवॉइस' नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। लेकिन उसने भविष्य में ऐसी देरी से बचने के लिए भारत निर्वाचन आयोग और विनिर्माताओं के साथ बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया है।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि विभाग को हर तीन महीने में धनराशि के उपयोग और प्राप्ति के कार्यक्रम पर नजर रखने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाना चाहिए।
सरकार ने अपनी कार्रवाई के संबंध में समिति को बताया कि ईवीएम और वीवीपैट की आपूर्ति करने के लिए निर्माताओं को भुगतान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है।
समिति को बताया गया कि ईवीएम की शुरुआत से ही इस विभाग द्वारा इस प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।
सरकार का कहना था कि हर बार भारत निर्वाचन आयोग, ईवीएम और वीवीपैट की खरीद के लिए चालान प्राप्त करने के बाद ही राशि जारी करने का अनुरोध करता है और समक्ष प्राधिकारी के अनुमोदन से ही निर्वाचन आयोग को अपेक्षित धनराशि वितरित की जाती है।
भाषा दीपक नरेश
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